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Mohit Subran
aur kab tak dhoyenge ye zindagi ka bojh ham
aur kab tak dhoyenge ye zindagi ka bojh ham | और कब तक ढोएँगे ये ज़िन्दगी का बोझ हम
- Mohit Subran
और
कब
तक
ढोएँगे
ये
ज़िन्दगी
का
बोझ
हम
और
कब
तक
मौत
काँधों
को
सताएगी
भला
- Mohit Subran
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जो
साँसों
को
गिनते
गिनते
जीता
है
उसकी
मौत
ज़रा
जल्दी
आ
जाती
है
Tanoj Dadhich
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उसके
जाने
और
आने
में
फ़क़त
यह
फ़र्क़
है
दूर
जाती
मौत
है
तो
पास
आती
ज़िन्दगी
Divy Kamaldhwaj
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जन्नत
में
आ
गया
था
किसी
अप्सरा
पे
दिल
जिसकी
सज़ा-ए-मौत
में
दुनिया
मिली
मुझे
Ankit Maurya
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बरस
रही
है
आँखें
हैं
ये
इनको
बादल
मत
कहना
मौत
हुई
है
दिल
की
मेरे
उसको
घाइल
मत
कहना
जीवन
भर
वो
साथ
रहेगा
प्यार
करेगा
बस
तुमको
मुझको
पागल
कह
देती
थी
उसको
पागल
मत
कहना
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Tanoj Dadhich
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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लेने
आएगी
मौत
जब
मुझको
मेरे
पहलू
में
आब-ए-ज़मज़म
हो
Amaan Pathan
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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मौत
का
एक
दिन
मुअय्यन
है
नींद
क्यूँँ
रात
भर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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न
ढाल
पाया
सभी
आँसुओं
को
शे'रों
में
कुछ
एक
अश्क
को
आँखों
से
ही
बहाना
पड़ा
Mohit Subran
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ख़ुद
को
उस
वक़्त
निखारा
होता
तो
बुलंदी
पे
सितारा
होता
रोकता
कौन
हमें
दुनिया
में
फिर
गर
उधर
से
भी
इशारा
होता
धूल
से
भर
गई
गुल्लक
वर्ना
मैं
तुझे
सब
से
पियारा
होता
जिस्म
जज़्बात
जिगर
को
मैंने
और
किसी
तन
में
उतारा
होता
यूँँ
न
उलझाता
लटें
ज़िन्दगी
की
ज़ुल्फ़
को
इस
की
सँवारा
होता
बहता
हूँ
दर्द
के
जिस
दरिया
में
कोई
तो
इसका
किनारा
होता
रास
बर्बादी
ही
आई
वर्ना
मैं
हर
इक
आँख
का
तारा
होता
लम्हा
जो
गुज़रा
दो
लम्हे
पहले
लम्हा
वो
हँस
के
गुज़ारा
होता
क्यूँ
दी
आवाज़
तुझे
डूबते
वक़्त
काश
तुझ
को
न
पुकारा
होता
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Mohit Subran
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नहीं
रहती
है
पहली
जीत
दिल
को
याद
आख़िर
तक
मगर
वो
हार
पहली
दिल
से
आख़िर
तक
नहीं
जाती
Mohit Subran
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नज़र
को
घुमाओ
ज़रा
और
देखो
कि
मौजूद
किरदार
इक-इक
यहीं
है
तुम्हारी
कहानी
हक़ीक़त
अगर
है
हमारा
भी
क़िस्सा
ख़याली
नहीं
है
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Mohit Subran
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हम
भी
बन
जाएँगे
आख़िर
में
फ़साना
इक
दिन
तुम
भी
इक
रोज़
हो
जाओगे
कहानी
कोई
Mohit Subran
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