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Mohit Subran
nahin rahtii hai pahli jeet dil ko yaad aakhir tak
nahin rahtii hai pahli jeet dil ko yaad aakhir tak | नहीं रहती है पहली जीत दिल को याद आख़िर तक
- Mohit Subran
नहीं
रहती
है
पहली
जीत
दिल
को
याद
आख़िर
तक
मगर
वो
हार
पहली
दिल
से
आख़िर
तक
नहीं
जाती
- Mohit Subran
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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दिल
हारने
के
बाद
ही
आता
है
ये
सुख़न
अब
तक
किसी
ने
कोख
से
शायर
नहीं
जना
Anas Khan
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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तमाम
ग़म
से
अलम
से
दुखों
से
गुज़रा
है
हर
एक
शख़्स
यहाँ
हादसों
से
गुज़रा
है
Mohit Subran
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आँखों
के
कोनों
से
फिसली
और
पलकों
से
छूट
गई
नींद
भी
इक
धागे
जैसी
है
टूट
गई
तो
टूट
गई
Mohit Subran
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ये
दुनिया
एक
मंडी
है
नहीं
इस
के
सिवा
कुछ
भी
यहाँ
जिस
को
भी
देखो
बिकने
को
तैयार
बैठा
है
Mohit Subran
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जहान
भर
के
ग़मों
ने
तो
हाए
बख़्श
दिया
मगर
ये
एक
तिरा
ग़म
निगल
गया
मुझ
को
Mohit Subran
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बह्र
का
इल्म
मात्रा
का
ज्ञान
शे'र
कहना
भी
है
गणित
जैसा
Mohit Subran
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