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Meem Alif Shaz
ham teri mehfil se uth ke chale to jaayenge
ham teri mehfil se uth ke chale to jaayenge | हम तेरी महफ़िल से उठ के चले तो जाएँगे
- Meem Alif Shaz
हम
तेरी
महफ़िल
से
उठ
के
चले
तो
जाएँगे
लेकिन
तेरी
आँखों
में
पानी
रह
जाएगा
- Meem Alif Shaz
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मैं
तुझे
बज़्म
में
लाऊँगा
मेरी
जान
मगर
लोग
जब
दूसरे
चेहरों
पे
फ़िदा
हो
जाएँ
Ashu Mishra
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हमीं
हैं
सोज़
हमीं
साज़
हैं
हमीं
नग़्मा
ज़रा
सँभल
के
सर-ए-बज़्म
छेड़ना
हम
को
Moin Ahsan Jazbi
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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न
जाने
कब
से
इक
मतला
लिए
बैठा
हूँ
महफ़िल
में
तुम्हारा
ज़िक्र
कर
दे
कोई
तो
पूरी
ग़ज़ल
कर
लूँ
Harsh saxena
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मुझ
सेे
होकर
के
ही
बे-ज़ार
चले
जाते
हैं
मेरी
महफ़िल
से
मेरे
यार
चले
जाते
हैं
मुझको
मालूम
है
रहता
नहीं
है
अब
वो
वहाँँ
साल
में
फिर
भी
हम
इक
बार
चले
जाते
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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अब
के
इस
बज़्म
में
कुछ
अपना
पता
भी
देना
पाँव
पर
पाँव
जो
रखना
तो
दबा
भी
देना
Zafar Iqbal
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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दोस्ती
में
सज़ा
की
तमन्ना
न
कर
मेरे
ज़ख़्मों
का
इतना
तमाशा
न
कर
मैं
अगर
गिर
गया
हूँ
बहुत
ज़ोर
से
तूने
मुझ
को
गिराया
है
दावा
न
कर
कल
मिले
थे
गले
भी
लगे
थे
सनम
सुब्ह
होते
ही
फिर
से
तक़ाज़ा
न
कर
आज
साया
है
कल
धूप
होगी
वहाँ
अपने
साए
का
ऐसा
तमाशा
न
कर
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Meem Alif Shaz
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उसको
बज़्म
में
ज़लील
कर
के
ख़ुश
न
हो
कि
शाज़
कपड़े
तिरे
भी
फटे
हैं
खींचने
में
यूँँ
उसे
Meem Alif Shaz
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दरख़्तों
से
न
तोड़ो
फूल
कोई
तुम
जुदाई
की
हक़ीक़त
पूछो
इक
माँ
से
Meem Alif Shaz
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कारवाँ
हौसले
का
सफ़र
में
है
'शाज़'
टूटा
तो
लूट
लेगा
सितमगर
कोई
Meem Alif Shaz
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अपनी
परवाज़
से
आसमाँ
में
है
तू
हाए
यह
किस
तरह
के
गुमाँ
में
है
तू
Meem Alif Shaz
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