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Meem Alif Shaz
usko bazm men zaleel kar ke KHush na ho ki shaaz
usko bazm men zaleel kar ke KHush na ho ki shaaz | उसको बज़्म में ज़लील कर के ख़ुश न हो कि शाज़
- Meem Alif Shaz
उसको
बज़्म
में
ज़लील
कर
के
ख़ुश
न
हो
कि
शाज़
कपड़े
तिरे
भी
फटे
हैं
खींचने
में
यूँँ
उसे
- Meem Alif Shaz
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ज़ोर
चलता
है
औरत
पे
सो
मर्द
ख़ुश
बीवी
पे
ख़त्म
मर्दानगी
की
समझ
Neeraj Neer
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ज़िंदगी
कितनी
मसर्रत
से
गुज़रती
या
रब
ऐश
की
तरह
अगर
ग़म
भी
गवारा
होता
Akhtar Shirani
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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तेरे
सिवा
भी
कई
रंग
ख़ुश
नज़र
थे
मगर
जो
तुझको
देख
चुका
हो
वो
और
क्या
देखे
Parveen Shakir
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तुम
इन
लबों
की
हँसी
और
ख़ुशी
पे
मत
जाना
ये
रोज़
रोज़
हमें
भी
फ़रेब
देते
हैं
Shadab Asghar
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पत्थरों
से
कोई
शिकवा
ही
नहीं
है
मेरे
दोस्त
बात
यह
है
तूने
फेंके
थे
हमारी
ही
तरफ़
Meem Alif Shaz
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कोई
मेरे
दिल
को
भी
शादाब
करे
सूखा
पड़ा
है
तन्हाई
के
मौसम
में
Meem Alif Shaz
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इस
जिस्म
के
लिए
भी
सच्ची
दु'आ
करो
जी
यह
उम्र
इस
को
खा
जाएगी
दवा
करो
जी
हर
रात
घूमता
है
चुप
चाप
आसमाँ
में
यह
चाँद
भी
अकेला
है
क्या
पता
करो
जी
काफ़ी
दिनों
से
कोई
झगड़ा
नहीं
हुआ
है
मुझ
से
मिरी
मोहब्बत
को
भी
ख़फ़ा
करो
जी
यह
हुस्न
कब
क़यामत
कर
दे
पता
नहीं
है
इस
हुस्न
में
छुपा
है
क्या
यह
पता
करो
जी
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Meem Alif Shaz
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कुछ
बोलो
वरना
कल
तुम
भी
निशाने
पर
होंगे
तीर
लगेगा
सीने
में
फिर
साँसें
बंद
होगी
Meem Alif Shaz
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मेरा
दिल
इक
ही
तो
है
यह
किस
किस
पे
मरता
गर
ऐसे
मरता
भी
तो
तुझ
से
हर
पल
डरता
Meem Alif Shaz
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