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Chandan Sharma
main us ke haathon men hooñ qaid ai dost
main us ke haathon men hooñ qaid ai dost | मैं उस के हाथों में हूँ क़ैद ऐ दोस्त
- Chandan Sharma
मैं
उस
के
हाथों
में
हूँ
क़ैद
ऐ
दोस्त
जो
लड़की
मेरे
किस्मत
में
नहीं
है
- Chandan Sharma
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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हमीं
तक
रह
गया
क़िस्सा
हमारा
किसी
ने
ख़त
नहीं
खोला
हमारा
मु'आफ़ी
और
इतनी
सी
ख़ता
पर
सज़ा
से
काम
चल
जाता
हमारा
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Shariq Kaifi
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ख़ूब-सूरत
ये
मोहब्बत
में
सज़ा
दी
उसने
फिर
गले
मिलके
मेरी
उम्र
बढ़ा
दी
उसने
Manzar Bhopali
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आज
पैवंद
की
ज़रूरत
है
ये
सज़ा
है
रफ़ू
न
करने
की
Fahmi Badayuni
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तोड़
कर
तुझको
भला
मेरा
भी
क्या
बन
जाता
उल्टा
मैं
ख़ुद
की
मुहब्बत
प
सज़ा
बन
जाता
जितनी
कोशिश
है
तिरी
एक
तवज्जोह
के
लिए
उस
सेे
कम
में
तो
मैं
दुनिया
का
ख़ुदा
बन
जाता
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Ashutosh Vdyarthi
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जन्नत
में
आ
गया
था
किसी
अप्सरा
पे
दिल
जिसकी
सज़ा-ए-मौत
में
दुनिया
मिली
मुझे
Ankit Maurya
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जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
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Mehshar Afridi
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इसी
लिए
तो
है
ज़िंदाँ
को
जुस्तुजू
मेरी
कि
मुफ़लिसी
को
सिखाई
है
सर-कशी
मैं
ने
Ali Sardar Jafri
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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मेरे
ही
साथ
रहना
था
तुम
को
मुझ
से
ही
दूर
जा
रही
हो
तुम
रात,
दरिया,
ये
चाँद,
तन्हाई
जाँ
बहुत
याद
आ
रही
हो
तुम
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Chandan Sharma
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प्यार
की
चुंदरी
ओढ़
ली
दिल
ने
तो
आग
ही
ओढ़
ली
थी
कई
बातें
कहने
को
पर
होठ
ने
ख़ामोशी
ओढ़
ली
ज़िंदगी
जब
सताने
लगी
ये
किया
शा'इरी
ओढ़
ली
है
नई
बात
ये
इनदिनों
ग़म
ने
संजीदगी
ओढ़
ली
मरते
मरते
बचे
बारहा
मौत
ने
ज़िंदगी
ओढ़
ली
मुझ
को
आँसू
छिपाने
थे
सो
मैंने
उसकी
हँसी
ओढ़
ली
उस
पे
फिर
रब
भी
मरने
लगा
उस
ने
जब
सादगी
ओढ़
ली
हिज्र
था
गमज़दा
पहले
फिर
हिज्र
ने
बेबसी
ओढ़
ली
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Chandan Sharma
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उल्फ़त
के
आड़े
में
तिजारत
अब
नहीं
मुझ
पर
तुम्हारी
ये
हुकूमत
अब
नहीं
मेरे
लिए
है
मेरी
तन्हाई
बहुत
मुझ
को
किसी
की
भी
ज़रूरत
अब
नहीं
हाँ
अब
तमन्ना
तो
नहीं
है
तेरी
पर
कैसे
को
मैं
कह
दूँ
मोहब्बत
अब
नहीं
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Chandan Sharma
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ये
मेरी
ग़ज़लें
और
कुछ
भी
नहीं
है
रिहर्सल
है
किसी
को
भूलने
की
Chandan Sharma
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याद
में
तेरी
खो
कर
हम
ग़ज़ल
बनाते
हैं
आफ़ताब
ढ़लता
है
जब
ये
शाम
होती
है
Chandan Sharma
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