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Chandan Sharma
pyaar ki chundari odh li
pyaar ki chundari odh li | प्यार की चुंदरी ओढ़ ली
- Chandan Sharma
प्यार
की
चुंदरी
ओढ़
ली
दिल
ने
तो
आग
ही
ओढ़
ली
थी
कई
बातें
कहने
को
पर
होठ
ने
ख़ामोशी
ओढ़
ली
ज़िंदगी
जब
सताने
लगी
ये
किया
शा'इरी
ओढ़
ली
है
नई
बात
ये
इनदिनों
ग़म
ने
संजीदगी
ओढ़
ली
मरते
मरते
बचे
बारहा
मौत
ने
ज़िंदगी
ओढ़
ली
मुझ
को
आँसू
छिपाने
थे
सो
मैंने
उसकी
हँसी
ओढ़
ली
उस
पे
फिर
रब
भी
मरने
लगा
उस
ने
जब
सादगी
ओढ़
ली
हिज्र
था
गमज़दा
पहले
फिर
हिज्र
ने
बेबसी
ओढ़
ली
- Chandan Sharma
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अपनी
नज़रों
में
गिर
चुका
हूँ
मैं
ये
तरीक़ा
भी
ख़ुद-कुशी
का
था
Bhavesh Pathak
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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जब
से
छेड़ा
है
मेरे
ज़ख़्मों
को
आ
रही
मौत
की
सदा
मुझको
Rachit Sonkar
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रहता
है
इबादत
में
हमें
मौत
का
खटका
हम
याद-ए-ख़ुदा
करते
हैं
कर
ले
न
ख़ुदा
याद
Akbar Allahabadi
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उभर
कर
हिज्र
के
ग़म
से
चुनी
है
ज़िंदगी
हमने
वगरना
हम
जहाँ
पर
थे
वहाँ
पर
ख़ुद-कुशी
भी
थी
Naved sahil
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मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
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Shariq Kaifi
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ऐ
ताइर-ए-लाहूती
उस
रिज़्क़
से
मौत
अच्छी
जिस
रिज़्क़
से
आती
हो
परवाज़
में
कोताही
Allama Iqbal
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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दिल
को
सुकून
रूह
को
आराम
आ
गया
मौत
आ
गई
कि
दोस्त
का
पैग़ाम
आ
गया
Jigar Moradabadi
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ज़िंदगी
खूब
नाचे
तेरे
ताल
पर
अब
सता
मत
मुझे
जान
घर
जाने
दे
Chandan Sharma
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मुहब्बत
या
हवस
में
था
अभी
तक
मैं
किस
के
दस्तरस
में
था
अभी
तक
Chandan Sharma
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मुसलसल
चल
रही
है
इंतिज़ारी
साल
बीता
रही
दिल
में
मुयस्सर
बेक़रारी
साल
बीता
Chandan Sharma
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मेरी
हुई
तो
नहीं
पर
नसीब
हो
फिर
भी
हो
दूर
मुझ
से
मगर
तुम
क़रीब
हो
फिर
भी
तेरा
नसीब
भी
ऐसा
हो
जैसे
मेरा
है
लगे
न
क़ल्ब
तेरा
भी
रक़ीब
हो
फिर
भी
न
जाने
कैसे
मोहब्बत
हुई
तुम्हें
"जाज़िब"
ये
जानते
हुए
भी
तुम
ग़रीब
हो
फिर
भी
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Chandan Sharma
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परिंदा
चला
आशियाना
बदल
कहाँ
एक
अपना
ठिकाना
हुआ
Chandan Sharma
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