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Chandan Sharma
mere hi saath rahna tha tum ko
mere hi saath rahna tha tum ko | मेरे ही साथ रहना था तुम को
- Chandan Sharma
मेरे
ही
साथ
रहना
था
तुम
को
मुझ
से
ही
दूर
जा
रही
हो
तुम
रात,
दरिया,
ये
चाँद,
तन्हाई
जाँ
बहुत
याद
आ
रही
हो
तुम
- Chandan Sharma
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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इन्हीं
ग़म
की
घटाओं
से
ख़ुशी
का
चाँद
निकलेगा
अँधेरी
रात
के
पर्दे
में
दिन
की
रौशनी
भी
है
Akhtar Shirani
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ख़ैरात
में
अब
दे
दिया
जाए
इसे
हर
रात
नीदें
ज़ाया'
होती
रहती
हैं
Nishant Singh
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मैं
जिस
के
साथ
कई
दिन
गुज़ार
आया
हूँ
वो
मेरे
साथ
बसर
रात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
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मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
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आज
की
रात
न
जाने
कितनी
लंबी
होगी
आज
का
सूरज
शाम
से
पहले
डूब
गया
है
Aanis Moin
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जैसे
देखा
हो
आख़िरी
सपना
रात
इतनी
उदास
थीं
आँखें
Siraj Faisal Khan
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चमेली
रात
कह
रही
थी
मेरी
बू
लिया
करें
और
इस
सेे
जी
नहीं
भरे
तो
मुझको
छू
लिया
करें
कभी
भी
अच्छे
देवता
नहीं
बनेंगे
ऐसे
आप
चढ़ावे
में
रुपए
नहीं
फ़क़त
लहू
लिया
करें
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Azbar Safeer
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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फूलों
की
दुकान
गए
हम
और
गुलाब
को
देखा
देख
के
छोड़
दिया
यानी
इन
आँखों
ने
फिर
आपके
ख़्वाब
को
देखा
देख
के
छोड़
दिया
बह्र-ए-मीर-(22×9)
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Chandan Sharma
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मैं
ख़ुद
को
पत्थर
दिल
कहता
फिरता
था
पर
मैं
शीशा
हूँ
मुझ
को
इक
पत्थर
ने
बताया
Chandan Sharma
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हिज्र
में
उस
ने
हाल
पूछा
मेरा
मैं
ने
सर
जॉन
का
कलाम
पढ़ा
Chandan Sharma
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ग़म
के
लब
से
मिला
के
अपने
लब
जाँ
सुनो
ग़म
को
चूमना
तुम
भी
हिज्र
में
होना
ना
उदास
कभी
हिज्र
में
मुझ
सा
झूमना
तुम
भी
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Chandan Sharma
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इस
तरह
ख़ुद-कुशी
की
है
मैंने
रात
दिन
शा'इरी
की
है
मैंने
इश्क़
तो
कर
नहीं
सका
कभी
भी
इश्क़
की
बंदगी
की
है
मैंने
हिज्र
में
कुछ
नहीं
किया
लेकिन
बातें
तेरी
कही
की
है
मैंने
हो
के
नाकाम
इश्क़
में
तेरे
खूब
आवारगी
की
है
मैंने
ठीक
है
मैं
क़बूल
करता
हूँ
हिज्र
में
दिल-लगी
की
है
मैंने
मैं
जिए
जा
रहा
हूँ
जाने
किसे
ये
किसे
ज़िंदगी
की
है
मैंने
बाँट
के
ख़ुद
को
दो
किनारों
में
ख़ुद
को
ही
इक
नदी
की
है
मैंने
जब
से
जाना
है
रौशनी
का
सच
कमरे
में
तीरगी
की
है
मैंने
दिल
को
बहलाने
के
लिए
अपने
कुछ
कभी
कुछ
कभी
की
है
मैंने
इश्क़
हो
तुम
सो
इश्क़
है
तुम
से
दोस्तों
से
दोस्ती
की
है
मैंने
नज़्म-ओ-ग़ज़लों
के
नाम
पर
"जाज़िब"
ज़िक्र
बस
आपकी
की
है
मैंने
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Chandan Sharma
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