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Dileep Kumar
jaisa main ne chaaha tha waisa nahin tha
jaisa main ne chaaha tha waisa nahin tha | जैसा मैं ने चाहा था वैसा नहीं था
- Dileep Kumar
जैसा
मैं
ने
चाहा
था
वैसा
नहीं
था
बातें
फिर
भी
ठीक
थी
लहजा
नहीं
था
मैं
ने
भी
उसको
नहीं
देखा
पलट
कर
और
उसने
भी
मुझे
रोका
नहीं
था
एक
तो
वो
भी
किसी
को
चाहती
थी
और
अच्छा
मैं
उसे
लगता
नहीं
था
क्या
सितम
है
तुम
पे
ग़ज़लें
लिख
रहें
हैं
हमको
ये
दुख
तो
कभी
लिखना
नहीं
था
उस
में
उतरा
तो
हुआ
मालूम
मुझको
वो
कुआँ
तो
था
मगर
गहरा
नहीं
था
दूसरों
के
तो
हमेशा
आया
है
काम
वो
जो
अपना
ध्यान
भी
रखता
नहीं
था
- Dileep Kumar
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एक
अजब
सानेहा
गुज़रा
है
मेरे
माज़ी
में
मेरी
दिलचस्पी
ख़त्म
हो
गई
है
शादी
में
Vishal Singh Tabish
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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ये
सिंदूर,
मेंहदी,
नथ,
महावर
मुबारक
हो
सितमगर
तुझे
अपना
नया
घर
मुबारक
हो
Harsh saxena
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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उनको
दूर
किया
जाता
है
जो
बरसों
के
साथी
हैं
और
अनजाने
लोगों
की
आपस
में
शादी
होती
है
Darpan
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जब
तक
होगा
नाम
मेरा
इस
दुनिया
में
तब
तक
तो
उसकी
शादी
हो
जाएगी
Tanoj Dadhich
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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तुम
भी
शादी
करके
हमको
भूल
गई
हम
भी
नाम
कमाने
में
मसरूफ़
हुए
Tanoj Dadhich
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ज़्यादा
अच्छे
होने
का
ये
नुकसान
है
धीरे
धीरे
हम-ज़बानी
आ
जाती
है
Dileep Kumar
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मुझे
तो
एक
ये
भी
काम
करना
था
सर-ए-बाज़ार
कुछ
नीलाम
करना
था
Dileep Kumar
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ये
सानेहा
भी
एक
दिन
होना
ही
था
इक
रोज़
पाकर
भी
उसे
खोना
ही
था
हम
हो
गए
हैं
गर
जुदा
तो
सोग
क्यूँ
जब
साथ
होकर
भी
हमें
रोना
ही
था
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Dileep Kumar
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ग़ुरूर
भी
बहुत
हैं
और
दिलकशी
नहीं
रही
तिरे
बिना
ये
ज़िंदगी
भी
ज़िंदगी
नहीं
रही
मिलें
हैं
आज
तीन-चार
साल
बाद
हम
कहीं
मगर
लबों
पे
उस
के
वो
शिकस्तगी
नहीं
रही
सभी
ही
तोड़ते
रहे
किसी
तरह
से
दिल
मिरा
मगर
मिरी
किसी
से
बे-त'अल्लुक़ी
नहीं
रही
ये
एक
शख़्स
का
मलाल
सीख
दे
गया
मुझे
जहाँ
में
अब
'दिलीप'
आदमी-गरी
नहीं
रही
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Dileep Kumar
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रात
जितनी
जगमगाती
रहती
है
उतना
ही
ये
दिल
दुखाती
रहती
है
वैसे
तो
मुझ
को
नहीं
कोई
कमी
तेरी
लेकिन
याद
आती
रहती
है
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Dileep Kumar
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