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Harsh saxena
ye sindoor mehndi nath mahaavar mubarak ho
ye sindoor mehndi nath mahaavar mubarak ho | ये सिंदूर, मेंहदी, नथ, महावर मुबारक हो
- Harsh saxena
ये
सिंदूर,
मेंहदी,
नथ,
महावर
मुबारक
हो
सितमगर
तुझे
अपना
नया
घर
मुबारक
हो
- Harsh saxena
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सब
कुछ
तो
है
क्या
ढूँडती
रहती
हैं
निगाहें
क्या
बात
है
मैं
वक़्त
पे
घर
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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उस
को
रुख़्सत
तो
किया
था
मुझे
मालूम
न
था
सारा
घर
ले
गया
घर
छोड़
के
जाने
वाला
Nida Fazli
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उसके
इश्क़
में
बाल
बढ़ाने
वालों
सुन
लो
उसके
घर
वाले
तो
पैसा
देखेंगे
Shaad Imran
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लोग
हर
मोड़
पे
रुक
रुक
के
सँभलते
क्यूँँ
हैं
इतना
डरते
हैं
तो
फिर
घर
से
निकलते
क्यूँँ
हैं
मोड़
होता
है
जवानी
का
सँभलने
के
लिए
और
सब
लोग
यहीं
आ
के
फिसलते
क्यूँँ
हैं
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Rahat Indori
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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यही
है
सिर्फ़
कारोबार
उसका
बँटे
है
शहर
भर
में
प्यार
उसका
बख़ूबी
है
पता
हर
चाल
हम
को
यक़ीं
फिर
भी
हमें
है
यार
उसका
किसी
का
दिल
दुखाती
ही
नहीं
वो
तभी
मशहूर
है
क़िरदार
उसका
मुझे
वो
हम
सेफ़र
कैसे
बनाये
ज़ियादा
सख़्त
है
परिवार
उसका
मुझे
मालूम
है
मैं
ही
नहीं
हूँ
यहाँ
हर
शख़्स
है
फ़नकार
उसका
दुपट्टा
ओढ़ना
है
बस
उसे
तो
क़यामत
है
यही
श्रृंगार
उसका
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Harsh saxena
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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बेवफ़ाई
ने
तिरी
मुझको
दिया
है
ये
हुनर
बस
यार
दुनिया
में
कहाँ
हर
भाग्य
में
ये
फ़न
लिखा
है
Harsh saxena
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ज़ख़्म
दिल
के
भरे
नहीं
अब
तक
और
इक
दर्द
फिर
हरा
कर
लूँ
अब
भरोसा
नहीं
किसी
का
पर
तू
कहे
तो
यक़ीं
तिरा
कर
लूँ
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Harsh saxena
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मुझको
ग़ैरों
की
बाँहों
से
भी
प्यारी
हैं
तेरी
यादों
में
जो
रातें
गुज़ारी
हैं
Harsh saxena
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