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Shaad Imran
uske ishq men baal badhaane waalon sun lo
uske ishq men baal badhaane waalon sun lo | उसके इश्क़ में बाल बढ़ाने वालों सुन लो
- Shaad Imran
उसके
इश्क़
में
बाल
बढ़ाने
वालों
सुन
लो
उसके
घर
वाले
तो
पैसा
देखेंगे
- Shaad Imran
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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नई
दुनिया
बनाऊँगा
मगर
मैं
अपनी
दुनिया
का
ख़ुदा
भी
इश्क़
में
खोया
हुआ
लड़का
बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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मोहब्बत
का
नहीं
इक
दिन
मुकर्रर
मोहब्बत
उम्रभर
का
सिलसिला
है
Neeraj Naveed
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मैं
दौड़
दौड़
के
ख़ुद
को
पकड़
के
लाता
हूँ
तुम्हारे
इश्क़
ने
बच्चा
बना
दिया
है
मुझे
Liaqat Jafri
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सोच
कर
पाँव
डालना
इस
में
इश्क़
दरिया
नहीं
है
दलदल
है
Renu Nayyar
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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कोई
पागल
ही
मोहब्बत
से
नवाज़ेगा
मुझे
आप
तो
ख़ैर
समझदार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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वो
जिसके
पास
में
पैसा
नहीं
है
ख़ुदा
उसका
कभी
होता
नहीं
है
ग़रीबी
का
हमारी
हाल
सुनलो
लटक
जाने
को
भी
पंखा
नहीं
है
तुझे
हम
ख़ुश
रखेंगे
ज़िंदगी
भर
ये
वा'दा
है,
मगर
दावा
नहीं
है
कहीं
से
मुझ
सेे
सरवत
कह
रहे
हैं
तुम्हारे
पास
अब
रस्ता
नहीं
है
ग़ज़ल
में
बस
उदासी
भर
रखी
है
ज़रा
भी
हुस्न
का
चर्चा
नहीं
है
तुम्हें
शायद
बहुत
से
'शाद'
दुख
हो
तेरे
चहरे
से
पर
लगता
नहीं
है
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Shaad Imran
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एक
ही
धोका
तो
दो
बार
नहीं
खाऊँगा
खा
तो
सकता
हूँ
मगर
यार
नहीं
खाऊँगा
इश्क़
दोनों
ने
किया
दोनों
को
पत्थर
मारो
मैं
अकेला
तो
मियाँ
मार
नहीं
खाऊँगा
काम
का
दुख
हूँ
मैं
सो
ऐ
मेरे
दफ़्तर
वाले
कैसे
कह
दूँ
तेरा
इतवार
नहीं
खाऊँगा
जुर्म
मेरा
भी
वही
है
कि
मैं
सच
बोलता
हूँ
ज़हर
लेकिन
मेरे
सरकार
नहीं
खाऊँगा
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Shaad Imran
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जितने
अपने
हैं
सब
पराए
हैं
बात
जानी
जब
ज़ख़्म
खाए
हैं
ये
सब
शराबी
कोई
और
नहीं
जाँ
तेरे
ठुकराए,
तेरे
सताए
हैं
ख़ून
थूका
तेरे
जाने
के
ग़म
मैं
हमनें
सिर्फ़
आँसू
नहीं
बहाए
हैं
मस्जिद
एक
रोज़
बुलाया
वाईज
ने
हमने
कह
दिया
नहीं
नहाए
हैं
मौत
पढ़ती
है
काम
करने
में
'शाद'
सिर्फ़
बातें
ही
बनाए
हैं
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Shaad Imran
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उस
से
बिछड़
कर
मौत
का
रस्ता
देखेंगे
आग
लगाकर
ख़ुद
को
जलता
देखेंगे
रोते
हुए
वो
और
भी
अच्छे
लगते
है
सुनते
ही
वो
दौड़
के
शीशा
देखेंगे
उसके
इश्क़
में
बाल
बढ़ाने
वाले
सुन
उसके
घर
वाले
तो
पैसा
देखेंगे
ख़्वाहिश
है
कि
उसकी
गोद
में
दम
निकले
लेकिन
उसको
कैसे
रोता
देखेंगे
पढ़ते
पढ़ते,
'शाद'
तेरी
ग़ज़लों
में
लोग
अपने
अपने
यार
का
चेहरा
देखेंगे
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Shaad Imran
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हमारी
ज़िंदगी
में
क्या
नया
है
वही
होता
है
जो,
वो
हो
रहा
है
ज़रा
दुनिया
का
अपनी
हाल
देखो
ज़रा
सोचो
कोई
सच-मुच
ख़ुदा
है?
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Shaad Imran
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