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Shaad Imran
ek hi dhoka to do baar nahin khaaunga
ek hi dhoka to do baar nahin khaaunga | एक ही धोका तो दो बार नहीं खाऊँगा
- Shaad Imran
एक
ही
धोका
तो
दो
बार
नहीं
खाऊँगा
खा
तो
सकता
हूँ
मगर
यार
नहीं
खाऊँगा
इश्क़
दोनों
ने
किया
दोनों
को
पत्थर
मारो
मैं
अकेला
तो
मियाँ
मार
नहीं
खाऊँगा
काम
का
दुख
हूँ
मैं
सो
ऐ
मेरे
दफ़्तर
वाले
कैसे
कह
दूँ
तेरा
इतवार
नहीं
खाऊँगा
जुर्म
मेरा
भी
वही
है
कि
मैं
सच
बोलता
हूँ
ज़हर
लेकिन
मेरे
सरकार
नहीं
खाऊँगा
- Shaad Imran
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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दुखे
हुए
लोगों
की
दुखती
रग
को
छूना
ठीक
नहीं
वक़्त
नहीं
पूछा
करते
हैं
यारों
वक़्त
के
मारों
से
Vashu Pandey
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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सर-ज़मीन-ए-हिंद
पर
अक़्वाम-ए-आलम
के
'फ़िराक़'
क़ाफ़िले
बसते
गए
हिन्दोस्ताँ
बनता
गया
Firaq Gorakhpuri
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इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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अब
ये
भी
नहीं
ठीक
कि
हर
दर्द
मिटा
दें
कुछ
दर्द
कलेजे
से
लगाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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मैं
उसे
वो
मुझको
समझाता
रहा
पर
त'अल्लुक़
फिर
भी
मुरझाता
रहा
Madan Mohan Danish
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खड़ा
हूँ
आज
भी
रोटी
के
चार
हर्फ़
लिए
सवाल
ये
है
किताबों
ने
क्या
दिया
मुझ
को
Nazeer Baaqri
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अब्र
जब
भी
गुज़रते
हैं
गली
से
रंग
चुरा
लेते
है
तेरी
ओढ़नी
से
Shaad Imran
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अपना
मिलना
है,
ख़ास
लोगों
से
यानी
की
बस
उदास
लोगों
से
Shaad Imran
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आरज़ू
दीद-ए-ख़ुदा
की
है
आरज़ू
भी
हमनें
क्या
की
है
तुझको
देखें
तो
होश
ही
न
रहे
अदाएँ
इस
क़दर
बला
की
है
किसी
सूरत
तुझे
अपना
बना
ले
बात
लेकिन
तेरी
रज़ा
की
है
तुमने
जिस
से
भी
की
बे-वफ़ाई
की
हमने
जिस
से
भी
की
वफ़ा
की
है
शा'इरी
होगी
उसी
शख़्स
से
"शाद"
ज़िन्दगी
जिसने
भी
तबाह
की
है
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Shaad Imran
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आजकल
हम
जफ़ा
पे
लिखते
हैं
यानी
तेरी
अदा
पे
लिखते
हैं
Shaad Imran
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दर्द-ए-दिल
की
दवा
नहीं
होती
इश्क़
में
इल्तिजा
नहीं
होती
बना
देने
से
डर
जहन्नुम
का
बंदगी
या
ख़ुदा
नहीं
होती
ज़िन्दगी
बे-वफ़ा
ही
होती
है
मौत
पर
बे-वफ़ा
नहीं
होती
कुछ
तो
गुज़री
है
तेरे
दिल
पे
'शाद'
शा'इरी
बेवजह
नहीं
होती
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Shaad Imran
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