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Dileep Kumar
ye saanehaa bhi ek din hona hi tha
ye saanehaa bhi ek din hona hi tha | ये सानेहा भी एक दिन होना ही था
- Dileep Kumar
ये
सानेहा
भी
एक
दिन
होना
ही
था
इक
रोज़
पाकर
भी
उसे
खोना
ही
था
हम
हो
गए
हैं
गर
जुदा
तो
सोग
क्यूँ
जब
साथ
होकर
भी
हमें
रोना
ही
था
- Dileep Kumar
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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राब्ता
लाख
सही
क़ाफ़िला-सालार
के
साथ
हम
को
चलना
है
मगर
वक़्त
की
रफ़्तार
के
साथ
Qateel Shifai
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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तू
कभी
मुझ
सेे
मिला
तस्वीर
मेरी
देख
फिर
कोई
जुदा
तस्वीर
मेरी
इक
बनानी
थी
उसे
ग़मगीन
सूरत
वो
बनाता
ही
गया
तस्वीर
मेरी
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Dileep Kumar
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जब
ख़बर
सनसनी
सी
रही
भीड़
कुछ
दिन
बनी
सी
रही
ख़्वाब
देखा
तिरा
जब
कभी
नींद
से
दुश्मनी
सी
रही
मैं
तिरे
बाद
भी
ख़ुश
था
पर
ज़िन्दगी
अन-मनी
सी
रही
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Dileep Kumar
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ये
ज़माना
भी
इसी
बा'इस
तिरा
है
झूठ
भी
सच
की
तरह
तू
बोलता
है
Dileep Kumar
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ख़्वाब
ऐसा
जो
मुकम्मल
भी,
नहीं
भी
इश्क़
में
वो
मेरे
पागल
भी,
नहीं
भी
ज़िंदगी
गर
इम्तिहाँ
लेती
रहेगी
इम्तिहाँ
होंगे
मुसलसल
भी,
नहीं
भी
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Dileep Kumar
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बिछड़ा
तो
पहले
रोया
बहुत
और
फिर
ख़ुद
पे
ही
हँस
पड़ा
Dileep Kumar
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