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Dileep Kumar
KHvaab aisa jo mukammal bhi nahin bhi
KHvaab aisa jo mukammal bhi nahin bhi | ख़्वाब ऐसा जो मुकम्मल भी, नहीं भी
- Dileep Kumar
ख़्वाब
ऐसा
जो
मुकम्मल
भी,
नहीं
भी
इश्क़
में
वो
मेरे
पागल
भी,
नहीं
भी
ज़िंदगी
गर
इम्तिहाँ
लेती
रहेगी
इम्तिहाँ
होंगे
मुसलसल
भी,
नहीं
भी
- Dileep Kumar
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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अदावत
मुहब्बत
रफ़ाक़त
नहीं
है
हमें
तुम
सेे
कोई
शिकायत
नहीं
है
दिलों
को
लगाने
लगे
हो
जहाँँ
तुम
वहाँ
तो
किसी
को
मुहब्बत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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हमारे
बाद
तेरे
इश्क़
में
नए
लड़के
बदन
तो
चू
मेंगे
ज़ुल्फ़ें
नहीं
सँवारेंगे
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Vikram Gaur Vairagi
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जँचने
लगा
है
दर्द
मुझे
आपका
दिया
बर्बाद
करने
वाले
ने
ही
आसरा
दिया
कल
पहली
बार
लड़ने
की
हिम्मत
नहीं
हुई
मुझको
किसी
के
प्यार
ने
बुजदिल
बना
दिया
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Kushal Dauneria
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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मैं
क़िस्सा
मुख़्तसर
कर
के,
ज़रा
नीची
नज़र
कर
के
ये
कहता
हूँ
अभी
तुम
से,
मोहब्बत
हो
गई
तुम
से
Zubair Ali Tabish
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फिर
वही
रोना
मुहब्बत
में
गिला
शिकवा
जहाँ
से
रस्म
है
बस
इसलिए
भी
तुम
को
साल-ए-नौ
मुबारक
Neeraj Neer
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वक़्त
के
साथ
सब
कुछ
बदल
जाता
है
उसका
इस
झूठ
से
काम
चल
जाता
है
Dileep Kumar
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मुझे
तो
एक
ये
भी
काम
करना
था
सर-ए-बाज़ार
कुछ
नीलाम
करना
था
Dileep Kumar
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मुझको
वो
इतना
बे-ज़ार
कर
देता
है
मेरा
जीना
भी
दुश्वार
कर
देता
है
जिस
तरह
हँस
के
मिलता
है
हर
एक
से
मुझको
भी
वो
मिलन-सार
कर
देता
है
वो
जो
मुमकिन
नहीं
है
कहानी
से
भी
काम
वो
एक
किरदार
कर
देता
है
घर
हो
जाते
हैं
मिसमार
इस
से
मगर
इक
ग़लत
दाँव
बेदार
कर
देता
है
इश्क़
कुछ
भी
नहीं
इक
मरज़
के
सिवा
अच्छे
अच्छों
को
बीमार
कर
देता
है
बोती
थी
पहले
नफ़रत
सियासत,
मगर
अब
ये
भी
काम
अख़बार
कर
देता
है
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Dileep Kumar
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जिन्हें
बे-हिसी
का
ज़रा
भी
पता
नइँ
उन्हें
ज़िंदगी
का
ज़रा
भी
पता
नइँ
मिरी
दोस्ती
की
हदें
जानता
है
मिरी
दुश्मनी
का
ज़रा
भी
पता
नइँ
मोहब्बत
में
कान्हा
तो
तुम
बन
गए
हो
मगर
रुक्मणी
का
ज़रा
भी
पता
नइँ
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Dileep Kumar
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दिन
भर
गर्मी
में
जलते
हैं
तब
जाकर
बच्चे
पलते
हैं
Dileep Kumar
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