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Abhishek Bhadauria 'Abhi'
koi hai baat jisse dar raha hooñ
koi hai baat jisse dar raha hooñ | कोई है बात जिस सेे डर रहा हूँ
- Abhishek Bhadauria 'Abhi'
कोई
है
बात
जिस
सेे
डर
रहा
हूँ
नहीं
मालूम
मैं
क्या
कर
रहा
हूँ
रहा
हूँ
मैं
किसी
का
हम–सफ़र
तो
किसी
की
राह
का
पत्थर
रहा
हूँ
किसी
के
वास्ते
वो
जी
रही
है
किसी
के
वास्ते
मैं
मर
रहा
हूँ
रहा
बे–चैन
मैं
बस
इस
वजह
से
कि
घर
होते
हुए
बे–घर
रहा
हूँ
किसी
को
भूल
जाने
के
लिए
मैं
किसी
के
साथ
हम–बिस्तर
रहा
हूँ
ग़ज़ल
पढ़कर
‘अभी’
वो
जान
लेगी
कहाँ
मैं
ज़िक्र
उसका
कर
रहा
हूँ
- Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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क्यूँँ
चलते
चलते
रुक
गए
वीरान
रास्तो
तन्हा
हूँ
आज
मैं
ज़रा
घर
तक
तो
साथ
दो
Adil Mansuri
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फिरता
है
कैसे-कैसे
सवालों
के
साथ
वो
उस
आदमी
की
जामातलाशी
तो
लीजिए
Dushyant Kumar
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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जिसके
हाथों
में
रेखाएँ
हो
क़िस्मत
की
वो
क़िस्मत
का
मारा
कैसे
हो
सकता
है
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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आने
से
जिसके
मिलती
थी
एक
अलग
ही
ख़ुशी
हमें
दरिया-ए-ज़िंदगी
से
वो
ग़म
की
लहर
चली
गई
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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ढलते
हुए
सूरज
में
वो
लाली
कहाँ
जो
लाली
उसके
रुख़्सार
पर
है
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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जो
तुम
ही
जा
चुके
हो
तो
अब
इनकी
क्या
ज़रूरत
है
सो
दिल
की
धड़कनों
को
अब
से
हम
आज़ाद
करते
हैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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फ़िक्र
होती
अगर
ज़रा
भी
तुम्हें
इस
तरह
रूठ
कर
नहीं
जाते
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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