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Armaan khan
sawaal iska nahin hai ki kyuuñ udaas hooñ main
sawaal iska nahin hai ki kyuuñ udaas hooñ main | सवाल इसका नहीं है कि क्यूँ उदास हूँ मैं
- Armaan khan
सवाल
इसका
नहीं
है
कि
क्यूँ
उदास
हूँ
मैं
अज़ाब
ये
है
कि
घर
जा
के
मुस्कुराना
है
- Armaan khan
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आप
क्या
आए
कि
रुख़्सत
सब
अंधेरे
हो
गए
इस
क़दर
घर
में
कभी
भी
रौशनी
देखी
न
थी
Hakeem Nasir
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
Mehshar Afridi
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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हमारे
घर
की
दीवारों
पे
'नासिर'
उदासी
बाल
खोले
सो
रही
है
Nasir Kazmi
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कहाँ
रोते
उसे
शादी
के
घर
में
सो
इक
सूनी
सड़क
पर
आ
गए
हम
Shariq Kaifi
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शहर
की
भीड़,चकाचौंध
से
उकताए
हुए
ऐसे
उकताए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
मुझ
सेे
मत
पूछ,मेरी
आँख
का
सूनापन
देख
तेरे
ठुकराए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
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Armaan khan
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थोड़ी
मिट्टी
गूँथ
और
इक
दिल
बना
कुछ
न
कर
रस्ते
को
ही
मंज़िल
बना
उसकी
हालत
पर
मैं
रोया
देर
तक
वो
मुझे
कहता
था
मुस्तक़बिल
बना
चाय
पर
चर्चा
चली
थी
इश्क़
पर
और
फिर
दोनों
का
अपना
बिल
बना
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Armaan khan
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हाँ
यही
मेरी
ख़ुद-शनासी
है
जिस्म
ताज़ा
है
रूह
बासी
है
सब
हँसी
को
हँसी
समझते
हैं
तुम
तो
समझो
हँसी
उदासी
है
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Armaan khan
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ख़्वाब
आया
तो
डर
गई
आँखें
नींद
टूटी
तो
भर
गई
आँखें
एक
लड़की
की
राह
तकते
हुए
मैं
तो
ज़िंदा
हूँ
मर
गई
आँखें
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Armaan khan
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तेरी
क़िस्मत
कहाँ-कहाँ,
और
मैं
एक
वीरान
सा
मकाँ
और
मैं
दूर
तक
आ
रहा
नज़र
कुछ
तो
एक
सिगरेट
का
धुआँ
और
मैं
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Armaan khan
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