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Armaan khan
shahar ki भीड़,चकाचौंध se uktaae hue
shahar ki भीड़,चकाचौंध se uktaae hue | शहर की भीड़,चकाचौंध से उकताए हुए
- Armaan khan
शहर
की
भीड़,चकाचौंध
से
उकताए
हुए
ऐसे
उकताए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
मुझ
सेे
मत
पूछ,मेरी
आँख
का
सूनापन
देख
तेरे
ठुकराए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
- Armaan khan
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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तू
अपने
सारे
दुख
जाकर
बताता
है
जिन्हें,
इक
दिन
बढ़ाएँगे
वही
ग़म-ख़्वार
तेरी
आँख
का
पानी
Siddharth Saaz
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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इक
नज़र
उस
चेहरे
की
देखी
है
जब
से
यार
मुँह
उतरा
हुआ
है
रौशनी
का
Harsh saxena
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माँ
जैसे
देखती
हो
तुम
मगर
मैं
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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तूफ़ानों
से
आँख
मिलाओ
सैलाबों
पे
वार
करो
मल्लाहों
का
चक्कर
छोड़ो
तैर
के
दरिया
पार
करो
Rahat Indori
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तुम्हारा
काम
इतना
है
कि
बस
काजल
लगा
लेना
तुम्हारी
आँख
की
ख़ातिर
नज़ारे
मैं
बनाऊँगा
Khalid Nadeem Shani
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भीगीं
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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तेरी
क़िस्मत
कहाँ-कहाँ,
और
मैं
एक
वीरान
सा
मकाँ
और
मैं
दूर
तक
आ
रहा
नज़र
कुछ
तो
एक
सिगरेट
का
धुआँ
और
मैं
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Armaan khan
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मौत
का
इंतिज़ार
किसको
है?
नींद
का
है,
मगर
नहीं
आती
Armaan khan
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है
ज़िन्दगी
से
इक
यही
गिला
मुझे
सभी
मिले,
मिला
नहीं
ख़ुदा
मुझे
कई
दिनों
से
ख़ुद
से
था
कटा-कटा
मैं
किस
सेे
पूछता
कि
क्या
हुआ
मुझे
ये
मो’जिज़ा
है
अब
तलक
हयात
हूँ
कई
दफ़ा
तो
इश्क़
भी
हुआ
मुझे।
जो
दूर
जा
चुका
उसे
ख़बर
करो
निगल
रहा
है
अब
ये
फ़ासला
मुझे
मैं
गाँव
आके
सोचता
हूँ
ऐ
ख़ुदा
लगे
न
शहर
की
कभी
हवा
मुझे
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Armaan khan
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ख़्वाब
आया
तो
डर
गई
आँखें
नींद
टूटी
तो
भर
गई
आँखें
एक
लड़की
की
राह
तकते
हुए
मैं
तो
ज़िंदा
हूँ
मर
गई
आँखें
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Armaan khan
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अब
तीरगी
परस्त
हैं
मसनद
नशीन
लोग
अब
ये
दु'आ
करो
कि
उजालों
की
ख़ैर
हो
ऐ
कातिब-ए-नसीब
मेरे
हक़
में
कुछ
तो
लिख
मंज़िल
नहीं
तो
पाँव
के
छालों
की
ख़ैर
हो
पूछा
है
दोस्ती
पे
किसी
ने
मुझे
सवाल
अब
क्या
कहूँ
मैं
छोड़िये,सालों
की
ख़ैर
हो
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Armaan khan
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