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Armaan khan
maut ka intizaar kisko hai
maut ka intizaar kisko hai | मौत का इंतिज़ार किसको है?
- Armaan khan
मौत
का
इंतिज़ार
किसको
है?
नींद
का
है,
मगर
नहीं
आती
- Armaan khan
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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ज़िस्त
की
जान
जाते
भी
देखा
हूँ
मैं
मौत
को
साँस
आते
भी
देखा
हूँ
मैं
सब
तो
हँसते
ही
हैं
मेरे
हालात
पे
दर्द
को
मुस्कुराते
भी
देखा
हूँ
मैं
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SHIV SAFAR
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आई
होगी
किसी
को
हिज्र
में
मौत
मुझ
को
तो
नींद
भी
नहीं
आती
Akbar Allahabadi
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जो
साँसों
को
गिनते
गिनते
जीता
है
उसकी
मौत
ज़रा
जल्दी
आ
जाती
है
Tanoj Dadhich
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लेने
आएगी
मौत
जब
मुझको
मेरे
पहलू
में
आब-ए-ज़मज़म
हो
Amaan Pathan
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वो
मिरी
बाहों
में
बे-फ़िक्र
मुलव्विस
हुई
है
कब्र
पे
हार
कोई
फूलों
का
रक्खा
हुआ
है
Raj
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ऐ
ताइर-ए-लाहूती
उस
रिज़्क़
से
मौत
अच्छी
जिस
रिज़्क़
से
आती
हो
परवाज़
में
कोताही
Allama Iqbal
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दिल
को
सुकून
रूह
को
आराम
आ
गया
मौत
आ
गई
कि
दोस्त
का
पैग़ाम
आ
गया
Jigar Moradabadi
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शायद
कि
मौत
ही
हो
मेरे
दर्द
का
इलाज
मतलब
कि
उसको
दिल
से
निकाला
न
जाएगा
Dev Niranjan
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राम
के
हाथों
मौत
लिखी
थी
रावण
की
वरना
तो
बजरंगबली
ही
काफ़ी
थे
Sanskar 'Sanam'
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बातें
कितनी
भारीभारी
करती
थी
देखो
भी
किस
सेे
हुश्यारी
करती
थी
हमने
उस
दिल
में
भी
दस्तक
दी
है
दोस्त
जिसकी
दुनिया
पहरेदारी
करती
थी
पागल
लड़की
देख
अकेले
पड़
गई
ना
मुझको
लेकर
रायशुमारी
करती
थी
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Armaan khan
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इश्क़
का
अपना
भी
में'आर
हुआ
करता
है
और
अब
उस
सेे
मैं
नीचे
तो
नहीं
आऊँगा
तुझे
कुछ
कहना
है
मुझ
सेे
तो
यहीं
पर
कह
दे
मैं
वो
'आशिक़
हूँ
जो
पीछे
तो
नहीं
आऊँगा।
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Armaan khan
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भंवर
में
गोते
लगा
रहे
हो
बताओ
साहिल
कहाँ
है
प्यारे
थकान
क़दमों
से
पूछती
है
तुम्हारी
मंज़िल
कहाँ
है
प्यारे
मैं
बेबसी
के
अब
उस
मुहाने
पे
आ
खड़ा
हूँ
कि
कोई
कह
दे
कि
जिसको
शिद्दत
से
चाहते
हो
तुम्हारे
क़ाबिल
कहाँ
है
प्यारे
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Armaan khan
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है
ज़िन्दगी
से
इक
यही
गिला
मुझे
सभी
मिले,
मिला
नहीं
ख़ुदा
मुझे
कई
दिनों
से
ख़ुद
से
था
कटा-कटा
मैं
किस
सेे
पूछता
कि
क्या
हुआ
मुझे
ये
मो’जिज़ा
है
अब
तलक
हयात
हूँ
कई
दफ़ा
तो
इश्क़
भी
हुआ
मुझे।
जो
दूर
जा
चुका
उसे
ख़बर
करो
निगल
रहा
है
अब
ये
फ़ासला
मुझे
मैं
गाँव
आके
सोचता
हूँ
ऐ
ख़ुदा
लगे
न
शहर
की
कभी
हवा
मुझे
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Armaan khan
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शहर
की
भीड़,चकाचौंध
से
उकताए
हुए
ऐसे
उकताए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
मुझ
सेे
मत
पूछ,मेरी
आँख
का
सूनापन
देख
तेरे
ठुकराए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
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Armaan khan
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