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Armaan khan
bhanwar men gote laga rahe ho batao saahil kahaan hai pyaare
bhanwar men gote laga rahe ho batao saahil kahaan hai pyaare | भंवर में गोते लगा रहे हो बताओ साहिल कहाँ है प्यारे
- Armaan khan
भंवर
में
गोते
लगा
रहे
हो
बताओ
साहिल
कहाँ
है
प्यारे
थकान
क़दमों
से
पूछती
है
तुम्हारी
मंज़िल
कहाँ
है
प्यारे
मैं
बेबसी
के
अब
उस
मुहाने
पे
आ
खड़ा
हूँ
कि
कोई
कह
दे
कि
जिसको
शिद्दत
से
चाहते
हो
तुम्हारे
क़ाबिल
कहाँ
है
प्यारे
- Armaan khan
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दु'आ
में
माँग
लूँ
मैं
उसको
लेकिन
फ़क़त
पाना
मेरा
मक़सद
नहीं
है
Shadab Asghar
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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पेड़
मुझे
हसरत
से
देखा
करते
थे
मैं
जंगल
में
पानी
लाया
करता
था
Tehzeeb Hafi
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हमीं
तलाश
के
देते
हैं
रास्ता
सब
को
हमीं
को
बा'द
में
रस्ता
दिखाया
जाता
है
Varun Anand
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बनाने
को
अमाँ
मैं
भी
बना
देता
हज़ारों,
पर
बहानों
से
कहीं
ज़्यादा
मुझे
मंज़िल
थी
ये
प्यारी
Sandeep dabral 'sendy'
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तलाश
रात
गए
रोकनी
पड़ीं
उनको
के
लाश
फेंक
दी
हमने
वहीं
कहीं
अपनी
Aakash Giri
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क़त्ल
से
पहले
वो
हर
शख़्स
के
दिल
की
हसरत
पूछ
लेता
था
मगर
पूरी
नहीं
करता
था
Vishnu virat
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ज़िंदगी
फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता
को
पा
सकती
नहीं
मौत
ही
आती
है
ये
मंज़िल
दिखाने
के
लिए
Hafeez Jalandhari
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कभी
तो
मुझे
छोड़
जाओगे
तुम
भी
कहोगे
मुझे
अब
कि
फुर्सत
नहीं
है
भला
इस
तरह
क्यूँ
सताने
लगे
हो
कहीं
छोड़
जाने
की
हसरत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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भटकती
रूहों
का
बोझ
कब
तक
कोई
उठाता
कहीं
ठहरता,पनाह
लेता,
तो
साथ
होता
मैं
जिस
'अक़ीदत
के
साथ
उसको
भुला
रहा
हूँ
उसी
'अक़ीदत
से
चाह
लेता,
तो
साथ
होता
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Armaan khan
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हुई
है
यार
ख़ुदा
तुझ
सेे
जबसे
बात
मेरी
कई
दिनों
से
बड़ी
मुतमइन
है
ज़ात
मेरी
Armaan khan
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हर
एक
चीज़
वहीं
है
जहाँ
पे
छोड़ी
थी
बस
एक
घर
ही
नहीं
आ
रहा
नज़र
घर
में
Armaan khan
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सवाल
इसका
नहीं
है
कि
क्यूँ
उदास
हूँ
मैं
अज़ाब
ये
है
कि
घर
जा
के
मुस्कुराना
है
Armaan khan
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तेरी
क़िस्मत
कहाँ-कहाँ,
और
मैं
एक
वीरान
सा
मकाँ
और
मैं
दूर
तक
आ
रहा
नज़र
कुछ
तो
एक
सिगरेट
का
धुआँ
और
मैं
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Armaan khan
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