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Armaan khan
har ek cheez wahin hai jahaan pe chhodi thii
har ek cheez wahin hai jahaan pe chhodi thii | हर एक चीज़ वहीं है जहाँ पे छोड़ी थी
- Armaan khan
हर
एक
चीज़
वहीं
है
जहाँ
पे
छोड़ी
थी
बस
एक
घर
ही
नहीं
आ
रहा
नज़र
घर
में
- Armaan khan
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भटकती
फिर
रही
है
आँख
घर
में
तिरी
आवाज़
इसको
दिख
रही
है
Himanshu Kiran Sharma
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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है
राम
के
वजूद
पे
हिन्दोस्ताँ
को
नाज़
अहल-ए-नज़र
समझते
हैं
उस
को
इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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किस
से
जा
कर
माँगिये
दर्द-ए-मोहब्बत
की
दवा
चारा-गर
अब
ख़ुद
ही
बेचारे
नज़र
आने
लगे
Shakeel Badayuni
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माँ
जैसे
देखती
हो
तुम
मगर
मैं
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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मैं
नज़र
से
पी
रहा
था
तो
ये
दिल
ने
बद-दुआ
दी
तिरा
हाथ
ज़िंदगी
भर
कभी
जाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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बाहर
अक्सर
शोर-शराबा
रहता
है
अंदर
इक
ख़ामोशी
पलती
रहती
है
हम
से
इक
अंदाज़
नहीं
बदला
जाता
दुनिया
कैसे
रंग
बदलती
रहती
है
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Armaan khan
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हुस्न
का
इम्कान
समझा
देर
से
मैं
नफ़ा-नुक़्सान
समझा
देर
से
उसके
'आशिक़
उसके
बारे
में
मेरा
भर
रहे
थे
कान,समझा
देर
से
मुझको
पहले
दिन
से
उस
सेे
इश्क़
था
और
वो
नादान
समझा
देर
से
जो
समझना
ज़िन्दगी
की
शर्त
थी
उसको
ही
इंसान
समझा
देर
से
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Armaan khan
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जिस-जिसकी
ज़बाँ
बोल
रही
प्यार,
मरेंगे
मैं
लिखता
हूँ
ले
जाओ,
मेरे
यार
मरेंगे
मेरी
तो
मोहब्बत
में
फ़क़त
हार
हुई
है
उस
लड़की
पे
तुम
देखना
दो
चार
मरेंगे
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Armaan khan
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चलते
रहना
थकान
जाएगी
और
क्या
होगा
जान
जाएगी
मैं
यही
सोचकर
अकेला
हूँ
वो
किसी
रोज़
मान
जाएगी
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Armaan khan
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मौत
का
इंतिज़ार
किसको
है?
नींद
का
है,
मगर
नहीं
आती
Armaan khan
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