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Armaan khan
chalte rahna thakaan jaayegi
chalte rahna thakaan jaayegi | चलते रहना थकान जाएगी
- Armaan khan
चलते
रहना
थकान
जाएगी
और
क्या
होगा
जान
जाएगी
मैं
यही
सोचकर
अकेला
हूँ
वो
किसी
रोज़
मान
जाएगी
- Armaan khan
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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कुछ
ख़ुशियाँ
कुछ
आँसू
दे
कर
टाल
गया
जीवन
का
इक
और
सुनहरा
साल
गया
Unknown
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लम्हे
उदास
उदास
फ़ज़ाएं
घुटी
घुटी
दुनिया
अगर
यही
है
तो
दुनिया
से
बच
के
चल
Shakeel Badayuni
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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यूँँ
ही
थोड़ी
मेरी
गज़लों
में
इतना
दुख
होता
है
इस
दुनिया
ने
हम
लड़कों
से
रोने
का
हक़
छीना
है
Harsh saxena
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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मैं
अँधेरों
से
बचा
लाया
था
अपने
आप
को
मेरा
दुख
ये
है
मिरे
पीछे
उजाले
पड़
गए
Rahat Indori
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ज़िंदगी
इक
फ़िल्म
है
मिलना
बिछड़ना
सीन
हैं
आँख
के
आँसू
तिरे
किरदार
की
तौहीन
हैं
Sandeep Thakur
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जिसे
जो
जी
में
आता
है
सो
लिखता
है
बड़ा
मुश्किल
है
कह
पाना
क़लम
का
दुख
Harsh saxena
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ये
फ़ासला
ज़रूर
है
मगर
ये
फ़ैसला
नहीं
सो
बेबसी
में
कह
रहा
हूँ
मैं
कोई
गिला
नहीं
मैं
देर
रात
कमरे
में
ये
सोचकर
के
आया
हूँ
अब
इसके
बाद
और
कोई
रास्ता
बचा
नहीं
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Armaan khan
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है
ज़िन्दगी
से
इक
यही
गिला
मुझे
सभी
मिले,
मिला
नहीं
ख़ुदा
मुझे
कई
दिनों
से
ख़ुद
से
था
कटा-कटा
मैं
किस
सेे
पूछता
कि
क्या
हुआ
मुझे
ये
मो’जिज़ा
है
अब
तलक
हयात
हूँ
कई
दफ़ा
तो
इश्क़
भी
हुआ
मुझे।
जो
दूर
जा
चुका
उसे
ख़बर
करो
निगल
रहा
है
अब
ये
फ़ासला
मुझे
मैं
गाँव
आके
सोचता
हूँ
ऐ
ख़ुदा
लगे
न
शहर
की
कभी
हवा
मुझे
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Armaan khan
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शहर
की
भीड़,चकाचौंध
से
उकताए
हुए
ऐसे
उकताए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
मुझ
सेे
मत
पूछ,मेरी
आँख
का
सूनापन
देख
तेरे
ठुकराए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
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Armaan khan
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मैं
इक
ख़याल
की
दुनिया
का
शाहज़ादा
हूँ
मेरे
ख़याल
की
क्यारी
का
फूल
थी
तुम
भी
मैं
एक
बार
मोहब्बत
में
फिर
शिकस्ता
रहा
सो
बेबसी
में
ये
कहता
हूँ
भूल
थी
तुम
भी
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Armaan khan
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हुई
है
यार
ख़ुदा
तुझ
सेे
जबसे
बात
मेरी
कई
दिनों
से
बड़ी
मुतमइन
है
ज़ात
मेरी
Armaan khan
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