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Armaan khan
hui hai yaar KHuda tujhse jabse baat meri
hui hai yaar KHuda tujhse jabse baat meri | हुई है यार ख़ुदा तुझ सेे जबसे बात मेरी
- Armaan khan
हुई
है
यार
ख़ुदा
तुझ
सेे
जबसे
बात
मेरी
कई
दिनों
से
बड़ी
मुतमइन
है
ज़ात
मेरी
- Armaan khan
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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बात
से
बात
बनेगी
तू
कभी
बात
तो
कर
आ
ज़रा
पास
मिरे
यार
मुलाक़ात
तो
कर
पूछ
तू
भी
तो
कभी
हाल
हमारे
दिल
का
हाल
से
हाल
मिलाने
की
शुरूआत
तो
कर
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shaan manral
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बातें
दवा
का
काम
कर
सकतीं
हैं
यार
बीमार
से
तुम
बात
करके
देखना
Shubhangi kalii
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ये
आरज़ू
भी
बड़ी
चीज़
है
मगर
हमदम
विसाल-ए-यार
फ़क़त
आरज़ू
की
बात
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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पहला
इश्क़
सफल
हो
जाए
यार
कहाँ
ये
मुमकिन
है
पहली
रोटी
गोल
बने
ये
तो
लगभग
नामुमकिन
है
Rituraj kumar
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तनक़ीद
न
तक़रार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
हैरत
है
मेरे
यार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
गूँगों
को
तकल्लुक़
के
मवाक़े
हैं
मुयस्सर
हम
माहिर-ए-गुफ़्तार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
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Ahmad Abdullah
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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सवाल
इसका
नहीं
है
कि
क्यूँ
उदास
हूँ
मैं
अज़ाब
ये
है
कि
घर
जा
के
मुस्कुराना
है
Armaan khan
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मैं
इक
ख़याल
की
दुनिया
का
शाहज़ादा
हूँ
मेरे
ख़याल
की
क्यारी
का
फूल
थी
तुम
भी
मैं
एक
बार
मोहब्बत
में
फिर
शिकस्ता
रहा
सो
बेबसी
में
ये
कहता
हूँ
भूल
थी
तुम
भी
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Armaan khan
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सोचा
नहीं
कि
क्यूँ
मुझे
नाकामियाँ
मिलीं
जब
अपने
ही
वजूद
में
सौ
ख़ामियाँ
मिलीं
तन्हाइयों
से
तंग
था
मैं
पिछले
कुछ
दिनों
फिर
एक
दिन
मुझे
मेरी
परछाइयाँ
मिलीं
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Armaan khan
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ये
मुहब्बत
है
मेरी
जाँ,
तुमको
आता
देखकर
आख़िरी
सिगरेट
भी
कोई
बुझाकर
फेंक
दे
Armaan khan
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आपसे
राबता
था
पहले
कोई
ओह,
हाँ,
याद
आया,
कैसे
हो
Armaan khan
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