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Armaan khan
teri qismat kahaan-kahaan aur main
teri qismat kahaan-kahaan aur main | तेरी क़िस्मत कहाँ-कहाँ, और मैं
- Armaan khan
तेरी
क़िस्मत
कहाँ-कहाँ,
और
मैं
एक
वीरान
सा
मकाँ
और
मैं
दूर
तक
आ
रहा
नज़र
कुछ
तो
एक
सिगरेट
का
धुआँ
और
मैं
- Armaan khan
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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जीत
हूँ
जश्न-ए-मुक़द्दर
हूँ
मैं
ठीक
से
देख
सिकंदर
हूँ
मैं
Ritesh Rajwada
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तदबीर
के
दस्त-ए-रंगीं
से
तक़दीर
दरख़्शाँ
होती
है
क़ुदरत
भी
मदद
फ़रमाती
है
जब
कोशिश-ए-इंसाँ
होती
है
Hafeez Banarasi
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ख़ुद
बुलाओ
के
वो
यूँँ
घर
से
नहीं
निकलेगा
यहाँ
इनाम
मुक़द्दर
से
नहीं
निकलेगा
ऐसे
मौसम
में
बिना
काम
के
आया
हुआ
शख़्स
इतनी
जल्दी
तेरे
दफ़्तर
से
नहीं
निकलेगा
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Khurram Afaq
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फिर
एक
रोज़
मुक़द्दर
से
हार
मानी
गई
ज़बीन
चूम
के
बोला
गया
"ख़ुदा
हाफ़िज़"
Afkar Alvi
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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कभी
मैं
अपने
हाथों
की
लकीरों
से
नहीं
उलझा
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
का
लिक्खा
भी
बदलता
है
Bashir Badr
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मेरी
तक़दीर
में
जलना
है
तो
जल
जाऊँगा
तेरा
वा'दा
तो
नहीं
हूँ
जो
बदल
जाऊँगा
Sahir Ludhianvi
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बी.ए
भी
पास
हों
मिले
बी-बी
भी
दिल-पसंद
मेहनत
की
है
वो
बात
ये
क़िस्मत
की
बात
है
Akbar Allahabadi
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सबको
हासिल
होने
में
कुछ
मजबूरी
क़ाएम
रख
सब
सेे
रिश्ते
रख
लेकिन
सब
सेे
दूरी
क़ाएम
रख
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Armaan khan
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शहर
की
भीड़,चकाचौंध
से
उकताए
हुए
ऐसे
उकताए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
मुझ
सेे
मत
पूछ,मेरी
आँख
का
सूनापन
देख
तेरे
ठुकराए
हुए
लोग
कहाँ
जीते
हैं
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Armaan khan
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हुई
है
यार
ख़ुदा
तुझ
सेे
जबसे
बात
मेरी
कई
दिनों
से
बड़ी
मुतमइन
है
ज़ात
मेरी
Armaan khan
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ऐ
दिल-ए-हक़
शनास
दुनिया
है
न
लगा
इस
सेे
आस,
दुनिया
है
रूह
को
है
तेरी
ख़ुदा
की
तलब
और
तेरे
आस
पास
दुनिया
है
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Armaan khan
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अब
तीरगी
परस्त
हैं
मसनद
नशीन
लोग
अब
ये
दु'आ
करो
कि
उजालों
की
ख़ैर
हो
ऐ
कातिब-ए-नसीब
मेरे
हक़
में
कुछ
तो
लिख
मंज़िल
नहीं
तो
पाँव
के
छालों
की
ख़ैर
हो
पूछा
है
दोस्ती
पे
किसी
ने
मुझे
सवाल
अब
क्या
कहूँ
मैं
छोड़िये,सालों
की
ख़ैर
हो
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Armaan khan
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