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Ankit gupta
kisko fursat hai jo dukh hamaare sune
kisko fursat hai jo dukh hamaare sune | किसको फ़ुर्सत है जो दुख हमारे सुने
- Ankit gupta
किसको
फ़ुर्सत
है
जो
दुख
हमारे
सुने
याँ
तो
हर
आदमी
ख़ुद
में
हैरान
है
- Ankit gupta
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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अच्छों
से
पता
चलता
है
इंसाँ
को
बुरों
का
रावन
का
पता
चल
न
सका
राम
से
पहले
Rizwan Banarasi
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रो
रहा
है
बशर
मगर
देखो
ज़िन्दगी
को
रफ़ू
नहीं
करता
Tarun Pandey
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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उसके
अच्छे
शे'र
नहीं
भाते
हमको
जो
अच्छा
इंसान
नहीं
बन
पाता
है
Tanoj Dadhich
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मोहब्बत
एक
ख़ुशबू
है
हमेशा
साथ
चलती
है
कोई
इंसान
तन्हाई
में
भी
तन्हा
नहीं
रहता
Bashir Badr
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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अरे
कैसों
के
आगे
रो
रहे
हो
अमाँ
बहरों
के
आगे
रो
रहे
हो
ज़रा
कहने
से
पहले
हाल
जानो
वो
जो
रोतों
के
आगे
रो
रहे
हो
वकालत
सच
की
तुम
तो
कर
रहे
हो
मगर
झूठों
के
आगे
रो
रहे
हो
यही
जीवन
का
अंतिम
सत्य
भी
है
तो
क्यूँ
लाशों
के
आगे
रो
रहे
हो
चले
आए
हो
तो
अर्ज़ी
लगा
लो
मगर
भूखों
के
आगे
रो
रहे
हो
इसे
जब
हाथ
का
ही
मैल
समझा
तो
क्यूँ
पैसों
के
आगे
रो
रहे
हो
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Ankit gupta
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न
तोड़ो
फूल
ये
सूना
लगेगा
गुलिस्ताँ
की
इसी
से
रौनक़ें
हैं
Ankit gupta
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इक
ख़्वाब
था
वो
हमको
मुयस्सर
नहीं
हुआ
करना
था
उसको
मोम
वो
पत्थर
नहीं
हुआ
चूमा
है
तुमने
गाल
तो
हम
होंठ
चू
मेंगे
देखो
अभी
हिसाब
बराबर
नहीं
हुआ
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Ankit gupta
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कुछ
याद
आ
गए
हैं
वो
मौसम
बहार
के
ऐसे
भले
सुख़न
है
कहें
उसने
प्यार
के
मदहोश
क्यूँ
हुए
हैं
ये
हम
सेे
तो
पूछिए
ज़ुल्फ़ें
झटक
के
वो
है
गए
मुँह
पे
मार
के
जज़्बात
थे
मेरे
वो
अँगूठी
महज़
न
थी
तुमने
जो
फेंक
दी
है
अँगूठी
उतार
के
मुझ
जैसे
बिगड़े
शख़्स
को
अच्छा
बना
दिया
लेकिन
बिछड़
गया
है
वो
हमको
सुधार
के
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Ankit gupta
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मैं
किसी
का
क्या
भला
हो
पाऊँगा
याद
है
तुमको,
तुम्हारा
था
कभी
Ankit gupta
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