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Ankit gupta
kuchh yaad aa ga.e hain vo mausam bahaar ke
kuchh yaad aa ga.e hain vo mausam bahaar ke | कुछ याद आ गए हैं वो मौसम बहार के
- Ankit gupta
कुछ
याद
आ
गए
हैं
वो
मौसम
बहार
के
ऐसे
भले
सुख़न
है
कहें
उसने
प्यार
के
मदहोश
क्यूँ
हुए
हैं
ये
हम
सेे
तो
पूछिए
ज़ुल्फ़ें
झटक
के
वो
है
गए
मुँह
पे
मार
के
जज़्बात
थे
मेरे
वो
अँगूठी
महज़
न
थी
तुमने
जो
फेंक
दी
है
अँगूठी
उतार
के
मुझ
जैसे
बिगड़े
शख़्स
को
अच्छा
बना
दिया
लेकिन
बिछड़
गया
है
वो
हमको
सुधार
के
- Ankit gupta
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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हो
गई
है
पीर
पर्वत
सी
पिघलनी
चाहिए
इस
हिमालय
से
कोई
गंगा
निकलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
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यहाँ
तुम
देखना
रुतबा
हमारा
हमारी
रेत
है
दरिया
हमारा
Kushal Dauneria
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शब
बसर
करनी
है,
महफ़ूज़
ठिकाना
है
कोई
कोई
जंगल
है
यहाँ
पास
में
?
सहरा
है
कोई
?
Umair Najmi
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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झुके
तो
जन्नत
उठे
तो
ख़ंजर
करेंगी
हम
को
तबाह
आँखें
Parul Singh "Noor"
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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तुम्हारे
साथ
हर
रस्ता
हसीं
था
तुम्हारे
बाद
केवल
ठोकरें
हैं
Ankit gupta
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इक
ख़्वाब
था
वो
हमको
मुयस्सर
नहीं
हुआ
करना
था
उसको
मोम
वो
पत्थर
नहीं
हुआ
चूमा
है
तुमने
गाल
तो
हम
होंठ
चू
मेंगे
देखो
अभी
हिसाब
बराबर
नहीं
हुआ
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Ankit gupta
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न
तोड़ो
फूल
ये
सूना
लगेगा
गुलिस्ताँ
की
इसी
से
रौनक़ें
हैं
Ankit gupta
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जो
कहता
है
बहकता
मैं
नहीं
हूँ
अभी
उसने
तुम्हें
देखा
नहीं
है
Ankit gupta
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सारे
जहाँ
में
हिज्र
का
मातम
बहुत
है
दोस्त
ऐसा
करो
कि
इश्क़
नहीं
दोस्ती
करो
Ankit gupta
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