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Ankit gupta
na todo phool ye soona lagega
na todo phool ye soona lagega | न तोड़ो फूल ये सूना लगेगा
- Ankit gupta
न
तोड़ो
फूल
ये
सूना
लगेगा
गुलिस्ताँ
की
इसी
से
रौनक़ें
हैं
- Ankit gupta
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नए
दौर
के
नए
ख़्वाब
हैं
नए
मौसमों
के
गुलाब
हैं
ये
मोहब्बतों
के
चराग़
हैं
इन्हें
नफ़रतों
की
हवा
न
दे
Bashir Badr
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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"उसके
हाथ
में
फूल
है"
मत
कहिए,
कहिए
उसका
हाथ
है
फूल
को
फूल
बनाने
में
Charagh Sharma
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियाँ
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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हम
इक
ही
लौ
में
जलाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
नई
हवा
से
बचाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
दरअस्ल
उसको
फ़क़त
चाय
ख़त्म
करनी
थी
हम
उसके
कप
को
सुनाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
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Zubair Ali Tabish
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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जहाँ
सारे
हवा
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
वहाँ
भी
हम
दिया
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
Abbas Qamar
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साल
ये
भी
चला
गया
आख़िर
ये
बता
क्या
नया
हुआ
आख़िर
हमने
तक़दीर
को
ही
समझा
सब
और
सबकुछ
हुआ
बुरा
आख़िर
चार
दिन
में
बिछड़
गए
हम
तुम
जिसका
डर
था
वही
हुआ
आख़िर
वस्ल
की
रात
साथ
में
हमने
हिज्र
का
ज़हर
भी
पिया
आख़िर
पहले
तो
साथ
चलते
थे
दोनों
उसने
रस्ता
बदल
लिया
आख़िर
हमने
हरदम
उसे
मुहब्बत
दी
उसने
फिर
ग़म
दिया
नया
आख़िर
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Ankit gupta
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तुम्हें
नफ़रत
हमीं
से
हो
रही
है
हमीं
हैं
चाहने
वाले
तुम्हारे
Ankit gupta
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जो
कहता
है
बहकता
मैं
नहीं
हूँ
अभी
उसने
तुम्हें
देखा
नहीं
है
Ankit gupta
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किसको
फ़ुर्सत
है
जो
दुख
हमारे
सुने
याँ
तो
हर
आदमी
ख़ुद
में
हैरान
है
Ankit gupta
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लगता
है
जैसे
हिज्र
में
कुछ
भी
बचा
नहीं
मेरा
ख़ुदा
भी
इन
दिनों
मेरा
ख़ुदा
नहीं
मैं
ख़ुश
बहुत
था
उस
घड़ी
तेरे
विसाल
में
जब
हिज्र
से
हुआ
था
मेरा
सामना
नहीं
ख़ुदगर्ज़
कैसे
इश्क़
में
हो
जाऊँ
मैं
तेरे
घर
से
शरीफ़
लड़का
कभी
भागता
नहीं
कितना
मैं
रो
रहा
हूँ
मगर
जानता
हूँ
ये
जो
जा
चुका
है
रोने
से
वो
लौटता
नहीं
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Ankit gupta
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