lagta hai jaise hijr men kuchh bhi bacha nahin | लगता है जैसे हिज्र में कुछ भी बचा नहीं

  - Ankit gupta
लगताहैजैसेहिज्रमेंकुछभीबचानहीं
मेराख़ुदाभीइनदिनोंमेराख़ुदानहीं
मैंख़ुशबहुतथाउसघड़ीतेरेविसालमें
जबहिज्रसेहुआथामेरासामनानहीं
ख़ुदगर्ज़कैसेइश्क़मेंहोजाऊँमैंतेरे
घरसेशरीफ़लड़काकभीभागतानहीं
कितनामैंरोरहाहूँमगरजानताहूँये
जोजाचुकाहैरोनेसेवोलौटतानहीं
  - Ankit gupta
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