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Ankit gupta
tumhaare saath to ab qafile hain
tumhaare saath to ab qafile hain | तुम्हारे साथ तो अब क़ाफ़िले हैं
- Ankit gupta
तुम्हारे
साथ
तो
अब
क़ाफ़िले
हैं
मगर
हम
आज
भी
तन्हा
खड़े
हैं
कभी
बाद-ए-सबास
पूछना
ये
तेरी
यादों
में
कितना
जागते
हैं
तुम्हारा
"आप"
कहना
खल
रहा
है
हमारे
बीच
कितने
फ़ासले
हैं?
कहीं
भी
दिल
नहीं
लगता
हमारा
तेरे
बारे
में
इतना
सोचते
हैं
तवक़्क़ो
ग़ैर
से
क्या?
जब
दुखों
में
हमारे
अपने
जुमले
कस
रहे
हैं
बचो
शीरीं
ज़बाँ
वालों
से
यारों
फँसाने
के
सभी
ये
चोचले
हैं
वहाँ
अब
जा
रहा
हूँ
यार
अंकित
जहाँ
कुछ
लोग
मुझको
जानते
हैं
- Ankit gupta
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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ये
लोग
कौन
हैं
आख़िर
कहाँ
से
आते
हैं
जो
जिस्म
नोच
के
फिर
बेटियाँ
जलाते
हैं
Shajar Abbas
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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कैसे
मंज़र
सामने
आने
लगे
हैं
गाते
गाते
लोग
चिल्लाने
लगे
हैं
Dushyant Kumar
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इश्क़
जब
तक
न
कर
चुके
रुस्वा
आदमी
काम
का
नहीं
होता
Jigar Moradabadi
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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मैं
किसी
का
क्या
भला
हो
पाऊँगा
याद
है
तुमको,
तुम्हारा
था
कभी
Ankit gupta
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इश्क़
में
सब
क़ुबूल
करते
हुए
मैंने
सोचा
न
भूल
करते
हुए
हँस
के
पूछी
है
ख़ैरियत
उसने
मन
के
काँटों
को
फूल
करते
हुए
इश्क़
ने
सब
तबाह
कर
डाला
इक
जवानी
को
धूल
करते
हुए
उम्र
का
कुछ
ख़याल
करना
था
काम
सारे
फ़ुज़ूल
करते
हुए
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Ankit gupta
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लगता
है
जैसे
हिज्र
में
कुछ
भी
बचा
नहीं
मेरा
ख़ुदा
भी
इन
दिनों
मेरा
ख़ुदा
नहीं
मैं
ख़ुश
बहुत
था
उस
घड़ी
तेरे
विसाल
में
जब
हिज्र
से
हुआ
था
मेरा
सामना
नहीं
ख़ुदगर्ज़
कैसे
इश्क़
में
हो
जाऊँ
मैं
तेरे
घर
से
शरीफ़
लड़का
कभी
भागता
नहीं
कितना
मैं
रो
रहा
हूँ
मगर
जानता
हूँ
ये
जो
जा
चुका
है
रोने
से
वो
लौटता
नहीं
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Ankit gupta
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तुम्हारे
साथ
हर
रस्ता
हसीं
था
तुम्हारे
बाद
केवल
ठोकरें
हैं
Ankit gupta
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इक
ख़्वाब
था
वो
हमको
मुयस्सर
नहीं
हुआ
करना
था
उसको
मोम
वो
पत्थर
नहीं
हुआ
चूमा
है
तुमने
गाल
तो
हम
होंठ
चू
मेंगे
देखो
अभी
हिसाब
बराबर
नहीं
हुआ
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Ankit gupta
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