jis din mere des ki miTTi | जिस दिन मेरे देस की मिट्टी

  - Zahid Dar
जिसदिनमेरेदेसकीमिट्टी
कोमलमिट्टी
पत्थरबनकर
महलोंऔरक़िलओंकेरूपमेंढलजाएगी
उसदिनगंदुमजलजाएगी
जिसदिनमेरेदेसकेदरियाओंकापानी
ठंडापानी
बिजलीबनकर
शहरोंकीकालीरातोंकीज़ीनतकासामानबनेगा
उसदिनचाँदपिघलजाएगा
जिसदिनमेरेदेसकीहल्कीतेज़हवाएँ
इंसानोंकेख़ूनसेभरजाएँगी
जिसदिनखेतोंकीख़ामोशी
बोझलधातकीआवाज़ोंमेंखोजाएगी
उसदिनसूरजबुझजाएगा
जीवनकीपगडंडीउसदिनसोजाएगी
  - Zahid Dar
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