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Zafar Siddqui
vo bade hi sakht tevar men dikha hai
vo bade hi sakht tevar men dikha hai | वो बड़े ही सख़्त तेवर में दिखा है
- Zafar Siddqui
वो
बड़े
ही
सख़्त
तेवर
में
दिखा
है
इश्क़
के
भी
आज
फ़ेवर
में
दिखा
है
हो
गई
काफ़ूर
चेहरे
की
कशिश
भी
हिज्र
का
ग़म
उसके
ज़ेवर
में
दिखा
है
- Zafar Siddqui
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इश्क़
मेरी
ज़ुबान
से
निकला
और
मैं
ख़ानदान
से
निकला
Siraj Faisal Khan
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इश्क़
को
छोड़
सब
चुन
लिया
उसने
फिर
रख
दिया
फल
को
फिर
टोकरी
से
अलग
Neeraj Neer
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परेशाँ
है
वो
झूटा
इश्क़
कर
के
वफ़ा
करने
की
नौबत
आ
गई
है
Fahmi Badayuni
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सुनते
हैं
इश्क़
नाम
के
गुज़रे
हैं
इक
बुज़ुर्ग
हम
लोग
भी
फ़क़ीर
इसी
सिलसिले
के
हैं
Firaq Gorakhpuri
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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तमाम
हैं
बिमारियाँ
मगर
तुम्हें
हुआ
है
इश्क़
तो
अब
तुम्हें
ज़रूरत-ए-दुआ
ही
है
दवा
नहीं
Hasan Raqim
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जी
नहीं
भरता
कभी
इक
बार
में
इश्क़
हम
ने
भी
दोबारा
कर
लिया
shaan manral
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अपने
इश्क़
का
यूँँ
इज़हार
करना
है
तुझ
सेे
तुझको
हाथों
से
पहनाएँगें
कानों
में
झुमके
Harsh saxena
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हर
गाम
तेरे
इश्क़
का
इकरार
है
मैं
हूँ
ज़ंजीर
है
ज़ंजीर
की
झनकार
है
मैं
हूँ
ऐ
ज़ीस्त
जो
सब
सेे
बड़ी
फ़नकार
है
तू
है
और
तुझ
सेे
बड़ा
वो
जो
अदाकार
है
मैं
हूँ
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Obaid Azam Azmi
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हुस्न
को
शर्मसार
करना
ही
इश्क़
का
इंतिक़ाम
होता
है
Asrar Ul Haq Majaz
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यूँँ
कोई
बे
वफ़ा
नहीं
होता
बे
सबब
ही
जुदा
नहीं
होता
आ
गए
लोग
कुछ
मदद
करने
हर
कोई
तो
बुरा
नहीं
होता
किस
घड़ी
किस
को
मौत
आ
जाए
ये
किसी
को
पता
नहीं
होता
जंग
दुश्मन
से
जीत
ली
मैंने
हौसला
हो
तो
क्या
नहीं
होता
ऐसे
रस्ते
पे
चल
पड़ा
हूँ
मैं
ख़त्म
ही
रास्ता
नहीं
होता
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Zafar Siddqui
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मुहब्बत
ये
मुहब्बत
वो
मुहब्बत
सिवाए
दर्द-ओ-ग़म
के
कुछ
नहीं
है
Zafar Siddqui
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कॉल
पर
कॉल
हमदम
करे
है
राह
दुश्वार
मौसम
करे
है
बीच
मझधार
में
फँस
गया
हूँ
आँख
ये
मसअला
नम
करे
है
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Zafar Siddqui
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उम्र
भर
की
मेरी
कमाई
हो
पास
आ
हिज्र
रिहाई
हो
तू
कोई
तो
दवा
बता
ऐसी
ज़ख़्म
की
जो
मिरे
दवाई
हो
ज़िन्दगी
भर
ही
ज़ख़्म
झेले
हैं
ज़ख़्म
से
काश
अब
जुदाई
हो
शोहरतें
क्यूँ
नहीं
मिलेंगी
मुझे
हर
तरफ़
मेरी
भी
बुराई
हो
फ़ाइलातुन
मुफ़ाइलुन
फ़ेलुन
काश
इस
बह्र
में
रुबाई
हो
एक
पल
भी
बता
मुझे
ऐसा
जब
'ज़फ़र'
ने
ख़ुशी
मनाई
हो
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Zafar Siddqui
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ये
तुम्हें
क्या
हुआ
है
क्या
ग़म
है
तुम
बताओ
तो
आँख
क्यूँ
नम
है
एक
ही
घूँट
में
शिफ़ा
होगी
पीके
देखो
ये
आब-ए-ज़मज़म
है
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Zafar Siddqui
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