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Zafar Siddqui
umr bhar ki meri kamaai ho
umr bhar ki meri kamaai ho | उम्र भर की मेरी कमाई हो
- Zafar Siddqui
उम्र
भर
की
मेरी
कमाई
हो
पास
आ
हिज्र
रिहाई
हो
तू
कोई
तो
दवा
बता
ऐसी
ज़ख़्म
की
जो
मिरे
दवाई
हो
ज़िन्दगी
भर
ही
ज़ख़्म
झेले
हैं
ज़ख़्म
से
काश
अब
जुदाई
हो
शोहरतें
क्यूँ
नहीं
मिलेंगी
मुझे
हर
तरफ़
मेरी
भी
बुराई
हो
फ़ाइलातुन
मुफ़ाइलुन
फ़ेलुन
काश
इस
बह्र
में
रुबाई
हो
एक
पल
भी
बता
मुझे
ऐसा
जब
'ज़फ़र'
ने
ख़ुशी
मनाई
हो
- Zafar Siddqui
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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मैं
तेरे
बाद
कोई
तेरे
जैसा
ढूँढता
हूँ
जो
बे-वफ़ाई
करे
और
बे-वफ़ा
न
लगे
Abbas Tabish
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ख़ुद
चले
आओ
या
बुला
भेजो
रात
अकेले
बसर
नहीं
होती
Aziz Lakhnavi
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तड़पना
हिज्र
तक
सीमित
नहीं
है
उसे
दुल्हन
भी
बनते
देखना
है
Anand Verma
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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उसे
समझने
का
कोई
तो
रास्ता
निकले
मैं
चाहता
भी
यही
था
वो
बे-वफ़ा
निकले
Waseem Barelvi
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तुम
पूछो
और
मैं
न
बताऊँ
ऐसे
तो
हालात
नहीं
एक
ज़रा
सा
दिल
टूटा
है
और
तो
कोई
बात
नहीं
Qateel Shifai
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दूरी
हुई
तो
उन
सेे
क़रीब
और
हम
हुए
ये
कैसे
फ़ासले
थे
जो
बढ़ने
से
कम
हुए
Waseem Barelvi
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वो
बे-वफ़ा
है
तो
क्या
मत
कहो
बुरा
उसको
कि
जो
हुआ
सो
हुआ
ख़ुश
रखे
ख़ुदा
उसको
Naseer Turabi
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तुम
अपने
बारे
में
कुछ
देर
सोचना
छोड़ो
तो
मैं
बताऊँ
कि
तुम
किस
क़दर
अकेले
हो
Waseem Barelvi
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हुस्न
की
मत
नुमाइश
किया
कीजिए
यूँँ
न
बे-पर्दा
छत
पर
दिखा
कीजिए
Zafar Siddqui
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मुझ
को
बख़्शी
है
तू
ने
ख़ुद्दारी
मुफ़्लिसी
दिल
से
शुक्रिया
तेरा
Zafar Siddqui
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यूँँ
सितम
उसने
माँ
पे
ढाया
है
माँ
के
ज़ेवर
ही
बेच
आया
है
चापलूसी
है
करता
बीवी
की
और
माँ
को
फ़क़त
सताया
है
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Zafar Siddqui
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मैने
बचा
रखा
है
ईमान
ज़िन्दगी
में
दूँ
साथ
हक
का
है
ये
अरमान
ज़िन्दगी
में
मैं
चल
पड़ा
मिटाने
नफ़रत
जहाँ
से
सारे
ये
राह
भी
नहीं
है
आसान
ज़िन्दगी
में
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Zafar Siddqui
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इश्क़
का
यूँँ
जवाब
लेना
है
यानी
उस
से
गुलाब
लेना
है
उसने
तोहफ़े
गिना
दिए
हैं
ज़फर
अब
तुझे
भी
हिसाब
लेना
है
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Zafar Siddqui
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