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Naseer Turabi
vo be-vafa hai to kya mat kaho bura usko
vo be-vafa hai to kya mat kaho bura usko | वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उसको
- Naseer Turabi
वो
बे-वफ़ा
है
तो
क्या
मत
कहो
बुरा
उसको
कि
जो
हुआ
सो
हुआ
ख़ुश
रखे
ख़ुदा
उसको
- Naseer Turabi
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हल्की-हल्की
सी
हँसी,
साफ
इशारा
भी
नहीं
जान
भी
ले
गए
और,
जान
से
मारा
भी
नहीं
Sawan Shukla
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दफ्न
ताबूत
में
कर
तिरी
हर
ख़ुशी
जश्न
कैसे
मनाते
है
मय्यत
पे
भी
ख़ास
तारीख़
थी
इम्तिहाँ
की
मगर
आज
बारात
उसकी
बुला
ली
गई
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Shilpi
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इस
क़दर
हम
ख़ुश
रखेंगे
आपको
ससुराल
में
आपको
महसूस
होगा
जी
रहे
ननिहाल
में
दो
गुलाबों
की
तरह
है
दो
चमेली
की
तरह
फ़र्क़
बस
इतना
तुम्हारे
होंठ
में
और
गाल
में
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Tanoj Dadhich
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इक
और
किताब
ख़त्म
की
फिर
उस
को
फाड़
कर
काग़ज़
का
इक
जहाज़
बनाया
ख़ुशी
हुई
Ameer Imam
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
Mehshar Afridi
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उदास
लोग
इसी
बात
से
हैं
ख़ुश
कि
चलो
हमारे
साथ
हुए
हादसों
की
बात
हुई
Abhishar Geeta Shukla
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नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
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Jaun Elia
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क्या
तकल्लुफ़
करें
ये
कहने
में
जो
भी
ख़ुश
है
हम
उस
से
जलते
हैं
Jaun Elia
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हर
शाम
इक
मलाल
की
आदत
सी
हो
गई
मिलने
का
इंतिज़ार
भी
मिलना
सा
हो
गया
Naseer Turabi
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ऐ
मेरी
ज़िंदगी
ऐ
मेरी
हम-नवा
तू
कहाँ
रह
गई
मैं
कहाँ
आ
गया
कुछ
न
अपनी
ख़बर
कुछ
न
तेरा
पता
तू
कहाँ
रह
गया
मैं
कहाँ
आ
गया
सब्ज़
शाख़ों
से
गुल
यूँँही
चुनना
कभी
गुल
से
गुलज़ार
के
ख़्वाब
बुनना
कभी
फ़ुर्सत-ए-इब्तिदा
हसरत-ए-इंतिहा
तू
कहाँ
रह
गई
मैं
कहाँ
आ
गया
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Naseer Turabi
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हम-रही
की
बात
मत
कर
इम्तिहाँ
हो
जाएगा
हम
सुबुक
हो
जाएँगे
तुझ
को
गिराँ
हो
जाएगा
Naseer Turabi
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अदावतें
थीं
तग़ाफ़ुल
था
रंजिशें
थीं
बहुत
बिछड़ने
वाले
में
सब
कुछ
था
बे-वफ़ाई
न
थी
Naseer Turabi
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मिलने
की
तरह
मुझ
सेे
वो
पल
भर
नहीं
मिलता
दिल
उस
से
मिला
जिस
सेे
मुक़द्दर
नहीं
मिलता
Naseer Turabi
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