hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Zafar Siddqui
ishq ka yuñ javaab lena hai
ishq ka yuñ javaab lena hai | इश्क़ का यूँँ जवाब लेना है
- Zafar Siddqui
इश्क़
का
यूँँ
जवाब
लेना
है
यानी
उस
से
गुलाब
लेना
है
उसने
तोहफ़े
गिना
दिए
हैं
ज़फर
अब
तुझे
भी
हिसाब
लेना
है
- Zafar Siddqui
Download Sher Image
इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
Read Full
Vikram Gaur Vairagi
Send
Download Image
64 Likes
मैं
दौड़
दौड़
के
ख़ुद
को
पकड़
के
लाता
हूँ
तुम्हारे
इश्क़
ने
बच्चा
बना
दिया
है
मुझे
Liaqat Jafri
Send
Download Image
34 Likes
मैं
सात
साल
से
अब
तक
हिसार-ए-इश्क़
में
हूँ
वो
शख़्स
आज
भी
मेरे
दिल-ओ-दिमाग़
में
है
Amaan Haider
Send
Download Image
4 Likes
मोहब्बत
का
नहीं
इक
दिन
मुकर्रर
मोहब्बत
उम्रभर
का
सिलसिला
है
Neeraj Naveed
Send
Download Image
6 Likes
इश्क़
माशूक़
इश्क़
'आशिक़
है
यानी
अपना
ही
मुब्तला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
Send
Download Image
37 Likes
दुकानें
नफ़रतों
की
ख़ूब
आसानी
से
चलती
हैं
अजब
दुनिया
है
जाने
इश्क़
क्यूँ
करने
नहीं
देती
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
26 Likes
होगा
किसी
दीवार
के
साए
में
पड़ा
'मीर'
क्या
रब्त
मोहब्बत
से
उस
आराम-तलब
को
Meer Taqi Meer
Send
Download Image
19 Likes
रास्ता
जब
इश्क़
का
मौजूद
है
फिर
किसी
की
क्यूँँ
इबादत
कीजिए?
ख़ुद-कुशी
करना
बहुत
आसान
है
कुछ
बड़ा
करने
की
हिम्मत
कीजिए
Read Full
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
43 Likes
याद
रखना
ही
मोहब्बत
में
नहीं
है
सब
कुछ
भूल
जाना
भी
बड़ी
बात
हुआ
करती
है
Jamal Ehsani
Send
Download Image
54 Likes
इश्क़
पर
ज़ोर
नहीं
है
ये
वो
आतिश
'ग़ालिब'
कि
लगाए
न
लगे
और
बुझाए
न
बने
Mirza Ghalib
Send
Download Image
92 Likes
Read More
देख
ली
उसकी
ये
हुनर
मंदी
उस
ने
दिल
को
बना
लिया
बंदी
ये
समर
ये
शज़र
हवा
ठंडी
ख़ूब-तर
शान
है
ख़ुदावंदी
सोचता
हूँ
निकाह
कर
डालूँ
चाहिए
बस
तेरी
रज़ा
मंदी
झूठ
पर
झूठ
बोलते
रहना
सच
पे
लागू
यहाँ
है
पाबंदी
सर
झुका
कर
ज़फर
वो
चलते
हैं
जिनकी
नज़रों
में
है
हया
मंदी
Read Full
Zafar Siddqui
Download Image
0 Likes
हाथ
में
उसके
अँगूठी
नाक
में
थी
उस
के
नथ
रात
मुझ
को
देख
कर
वो
ख़ूब
शरमाती
रही
Zafar Siddqui
Send
Download Image
0 Likes
सब
हमीं
पर
ही
लाज़मी
है
क्या
तुम
भी
वा'दा
कभी
करो
कोई
Zafar Siddqui
Send
Download Image
0 Likes
भूख
से
जंग
थी
ज़िन्दगी
की
हार
कर
भूख
से
ख़ुद-कुशी
की
वो
अँधेरों
से
घबरा
गया
है
है
ज़रूरत
उसे
रौशनी
की
हर
गली
जगमगाती
है
देखो
रात
है
कुछ
अलग
मुम्बई
की
नफ़रतों
को
जगह
ही
नहीं
दी
बस
मुहब्बत
की
ही
शा'इरी
की
कह
दिया
उसने
मिलते
ही
दौलत
अब
ज़रूरत
नहीं
है
किसी
की
दुश्मनी
यूँँ
निभाई
है
उसने
दुश्मनों
से
मिरे
दोस्ती
की
मैं
मोहब्बत
से
मिलने
लगा
तो
उसने
भी
नफ़रतों
में
कमी
की
है
ज़फर
लखनऊ
घर
अदब
का
है
यहाँ
क़द्र
दानिश-वरी
की
Read Full
Zafar Siddqui
Download Image
0 Likes
ये
तुम्हें
क्या
हुआ
है
क्या
ग़म
है
तुम
बताओ
तो
आँख
क्यूँ
नम
है
एक
ही
घूँट
में
शिफ़ा
होगी
पीके
देखो
ये
आब-ए-ज़मज़म
है
Read Full
Zafar Siddqui
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Aam Shayari
Angdaai Shayari
Aag Shayari
Aabroo Shayari
Haalaat Shayari