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Vigyan Vrat
jaane kya kuchh kar baitha hai
jaane kya kuchh kar baitha hai | जाने क्या कुछ कर बैठा है
- Vigyan Vrat
जाने
क्या
कुछ
कर
बैठा
है
बहुत
दिनों
से
घर
बैठा
है
वो
मधुमास
लिखे
भी
कैसे
शाखों
पर
पतझर
बैठा
है
- Vigyan Vrat
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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जितने
मर्ज़ी
महँगे
पकवानों
को
खालो
तुम
घर
की
रोटी
तो
फिर
घर
की
रोटी
होती
है
Sarvjeet Singh
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इक
दिए
से
एक
कमरा
भी
बहुत
है
दिल
जलाने
से
ये
घर
रौशन
हुआ
है
Neeraj Neer
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सब
कुछ
तो
है
क्या
ढूँडती
रहती
हैं
निगाहें
क्या
बात
है
मैं
वक़्त
पे
घर
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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हमारे
घर
की
दीवारों
पे
'नासिर'
उदासी
बाल
खोले
सो
रही
है
Nasir Kazmi
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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और
सुनाओ
कैसे
हो
तुम
अब
तक
पहले
जैसे
हो
तुम
अच्छा
अब
ये
तो
बतलाओ
कैसे
अपने
जैसे
हो
तुम
यार
सुनो
घबराते
क्यूँ
हो
क्या
कुछ
ऐसे
वैसे
हो
तुम
क्या
अब
अपने
साथ
नहीं
हो
तो
फिर
जैसे
तैसे
हो
तुम
ऐश-परस्ती
तुम
से
तौबा
मज़दूरी
के
पैसे
हो
तुम
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Vigyan Vrat
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ख़्वाबों
की
ता'बीरें
भी
हों
यादों
की
तस्वीरें
भी
हों
अपने
उनवानों
जैसी
ही
काश
कि
कुछ
तहरीरें
भी
हों
लाख
तरीक़े
मर
जाने
के
जीने
की
तदबीरें
भी
हों
सिर्फ़
लकीरों
से
क्या
होगा
हाथों
में
तक़दीरें
भी
हों
सिर्फ़
उठें
जो
हक़
की
ख़ातिर
कुछ
ऐसी
शमशीरें
भी
हों
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Vigyan Vrat
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जितने
लोग
शहर
में
हैं
एक
मुसलसल
डर
में
हैं
मंज़िल
पीछे
छूट
गई
फिर
भी
लोग
सफ़र
में
हैं
सिर्फ़
मिरे
क़दमों
के
निशाँ
मेरी
राहगुज़र
में
हैं
उन
से
उत्तर
क्या
पूछा
प्रश्न
कई
उत्तर
में
हैं
ख़ैर
तो
है
'विज्ञान'
मियाँ
काफ़ी
दिन
से
घर
में
हैं
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Vigyan Vrat
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देखो
क्या
दीवाना
है
अपना
आप
निशाना
है
यूँँ
तो
साथ
ज़माना
है
पर
ख़ुद
से
बेगाना
है
उस
को
क्या
समझाओगे
वो
ख़ुद
एक
सियाना
है
वो
इतने
दिन
बाद
मिला
मुश्किल
से
पहचाना
है
तुम
से
घर
कहलाता
था
अब
तो
सिर्फ़
घराना
है
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Vigyan Vrat
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