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Vigyan Vrat
jitne log shahar men hain
jitne log shahar men hain | जितने लोग शहर में हैं
- Vigyan Vrat
जितने
लोग
शहर
में
हैं
एक
मुसलसल
डर
में
हैं
मंज़िल
पीछे
छूट
गई
फिर
भी
लोग
सफ़र
में
हैं
सिर्फ़
मिरे
क़दमों
के
निशाँ
मेरी
राहगुज़र
में
हैं
उन
से
उत्तर
क्या
पूछा
प्रश्न
कई
उत्तर
में
हैं
ख़ैर
तो
है
'विज्ञान'
मियाँ
काफ़ी
दिन
से
घर
में
हैं
- Vigyan Vrat
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जिस
दौर
से
माज़ी
मिरा
गुज़रा
है
ना
उस
दौर
से
अच्छा
है
ये
तन्हा
सफ़र
Bhoomi Srivastava
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मैं
लौटने
के
इरादे
से
जा
रहा
हूँ
मगर
सफ़र
सफ़र
है
मिरा
इंतिज़ार
मत
करना
Sahil Sahri Nainitali
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हम-सफ़र
चाहिए
हुजूम
नहीं
इक
मुसाफ़िर
भी
क़ाफ़िला
है
मुझे
Ahmad Faraz
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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ज़िंदगी
अपना
सफ़र
तय
तो
करेगी
लेकिन
हम-सफ़र
आप
जो
होते
तो
मज़ा
और
ही
था
Ameeta Parsuram Meeta
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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कोई
तुम्हारा
सफ़र
पर
गया
तो
पूछेंगे
रेल
देख
के
हम
हाथ
क्यूँ
हिलाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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बाग़-ए-बहिश्त
से
मुझे
हुक्म-ए-सफ़र
दिया
था
क्यूँँ
कार-ए-जहाँ
दराज़
है
अब
मिरा
इंतिज़ार
कर
Allama Iqbal
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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ख़्वाबों
की
ता'बीरें
भी
हों
यादों
की
तस्वीरें
भी
हों
अपने
उनवानों
जैसी
ही
काश
कि
कुछ
तहरीरें
भी
हों
लाख
तरीक़े
मर
जाने
के
जीने
की
तदबीरें
भी
हों
सिर्फ़
लकीरों
से
क्या
होगा
हाथों
में
तक़दीरें
भी
हों
सिर्फ़
उठें
जो
हक़
की
ख़ातिर
कुछ
ऐसी
शमशीरें
भी
हों
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Vigyan Vrat
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जाने
क्या
कुछ
कर
बैठा
है
बहुत
दिनों
से
घर
बैठा
है
वो
मधुमास
लिखे
भी
कैसे
शाखों
पर
पतझर
बैठा
है
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Vigyan Vrat
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देखो
क्या
दीवाना
है
अपना
आप
निशाना
है
यूँँ
तो
साथ
ज़माना
है
पर
ख़ुद
से
बेगाना
है
उस
को
क्या
समझाओगे
वो
ख़ुद
एक
सियाना
है
वो
इतने
दिन
बाद
मिला
मुश्किल
से
पहचाना
है
तुम
से
घर
कहलाता
था
अब
तो
सिर्फ़
घराना
है
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और
सुनाओ
कैसे
हो
तुम
अब
तक
पहले
जैसे
हो
तुम
अच्छा
अब
ये
तो
बतलाओ
कैसे
अपने
जैसे
हो
तुम
यार
सुनो
घबराते
क्यूँ
हो
क्या
कुछ
ऐसे
वैसे
हो
तुम
क्या
अब
अपने
साथ
नहीं
हो
तो
फिर
जैसे
तैसे
हो
तुम
ऐश-परस्ती
तुम
से
तौबा
मज़दूरी
के
पैसे
हो
तुम
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