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Usman Saifi
ham is ghar ko kab se sambhaale hue hain
ham is ghar ko kab se sambhaale hue hain | हम इस घर को कब से सँभाले हुए हैं
- Usman Saifi
हम
इस
घर
को
कब
से
सँभाले
हुए
हैं
इसी
घर
से
तो
हम
निकाले
हुए
हैं
करी
जब
हिफ़ाज़त
तो
हमने
ये
देखा
हमारे
भी
हाथों
पे
छाले
हुए
हैं
दु'आ
उस
सेे
जब
भी
मिली
है
मुझे
तब
मिरी
ज़िंदगी
में
उजाले
हुए
हैं
नहीं
कोई
शिकवा
रहा
उलझनों
से
हम
अब
उलझनों
के
हवाले
हुए
हैं
ये
जो
डस
रहे
हैं
मुझे
आजकल
यूँँ
सभी
साँप
ये
मेरे
पाले
हुए
हैं
- Usman Saifi
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दवा
से
हल
न
हुआ
तो
दु'आ
पे
छोड़
दिया
तिरा
मोआ'मला
हम
ने
ख़ुदा
पे
छोड़
दिया
Khurram Afaq
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कौन
देकर
गया
दु'आ
दिल
को
उम्र
भर
दर्द
ही
रहा
दिल
को
दस्तकें
दे
रहा
है
कुछ
दिन
से
हम
सेे
क्या
काम
पड़
गया
दिल
को
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Subhan Asad
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नाम
होंटों
पे
तिरा
आए
तो
राहत
सी
मिले
तू
तसल्ली
है
दिलासा
है
दु'आ
है
क्या
है
Naqsh Lyallpuri
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पहले
पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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तिरा
दिल
मुस्कुराएगा
दु'आ
है
हमें
भी
तो
भरोसा
है
ख़ुदा
पर
Meem Alif Shaz
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दु'आ
में
माँग
लूँ
मैं
उसको
लेकिन
फ़क़त
पाना
मेरा
मक़सद
नहीं
है
Shadab Asghar
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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तेरे
होंठो
से
गर
इक
काम
लेना
हो
तेरे
होंठो
से
हम
बस
इक
दु'आ
लेंगे
Siddharth Saaz
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हर
एक
सितम
पे
दाद
दी
हर
ज़ख़्म
पे
दु'आ
हमने
भी
दुश्मनों
को
सताया
बहुत
दिनों
Nawaz Deobandi
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अल्लाह
अल्लाह
हुस्न
की
ये
पर्दा-दारी
देखिए
भेद
जिस
ने
खोलना
चाहा
वो
दीवाना
हुआ
Arzoo Lakhnavi
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गुलों
सा
खिल
गया
चेहरा
तो
आने
से
मगर
लब
सिल
गए
मेरे
तो
जाने
से
नज़र
का
रोज़
सदक़ा
हम
उतारेंगे
कोई
मिल
जाए
ख़ाली
हाथ
उठाने
से
नहीं
है
यार
मेरा
फिर
भी
लगता
है
मिला
है
आज
देखो
सर
झुकाने
से
रहेगी
जान
जब
तक
जिस्म
में
यारों
कभी
भूलें
न
हम
रस्ते
भुलाने
से
सुनी
है
बात
उसने
जो
नहीं
है
वो
बढ़ी
है
बात
अब
उसके
बढ़ाने
से
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Usman Saifi
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बड़ी
मुश्किल
से
अपने
ज़ख़्म
टाले
थे
सभी
अरमान
इस
दिल
से
निकाले
थे
डसा
मुझको
उन्हीं
साँपों
ने
है
हरपल
जो
मैंने
आस्तीनों
में
ही
पाले
थे
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Usman Saifi
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मुझे
दुनिया
ये
अब
पागल
बनाती
है
मुझे
माँ
तू
बहुत
ही
याद
आती
है
दु'आ
जो
मेरे
हक़
में
की
थी
तूने
तब
मुझे
सबकी
नज़र
से
वो
बचाती
है
नहीं
है
कोई
भी
जो
मुझको
समझेगा
मुझे
माँ
ख़्वाब
में
आकर
बताती
है
हमेशा
हौसलों
को
दीं
उड़ानें
फिर
ये
क्यूँ
दुनिया
मज़ाक़
अब
भी
उड़ाती
है
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Usman Saifi
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ज़ईफ़ों
की
दु'आओं
का
असर
देखो
हुई
है
ज़िंदगी
ख़ुश
अब
बसर
देखो
रखी
है
मौत
मुट्ठी
में
सनम
जब
से
नहीं
है
हादसों
में
अब
कसर
देखो
चली
है
बात
कितनी
दूर
तक
यारों
मिरी
इस
बात
का
भी
तो
सफ़र
देखो
कमी
रहने
लगी
अब
दुश्मनों
की
भी
मिरे
यारों
की
ये
झूटी
ख़बर
देखो
लगा
था
साथ
देगा
उम्र
भर
तक
वो
है
बदली
उसने
अपनी
अब
नज़र
देखो
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Usman Saifi
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इस
उजड़े
हुए
घर
को
आबाद
तो
कर
ज़रा
सा
तू
इस
दिल
को
अब
शाद
तो
कर
मुहब्बत
में
अव्वल
तिरा
नाम
होगा
ज़रा
इस
परिंदे
को
आज़ाद
तो
कर
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Usman Saifi
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