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Usman Saifi
gulon sa khil gaya chehra to aane se
gulon sa khil gaya chehra to aane se | गुलों सा खिल गया चेहरा तो आने से
- Usman Saifi
गुलों
सा
खिल
गया
चेहरा
तो
आने
से
मगर
लब
सिल
गए
मेरे
तो
जाने
से
नज़र
का
रोज़
सदक़ा
हम
उतारेंगे
कोई
मिल
जाए
ख़ाली
हाथ
उठाने
से
नहीं
है
यार
मेरा
फिर
भी
लगता
है
मिला
है
आज
देखो
सर
झुकाने
से
रहेगी
जान
जब
तक
जिस्म
में
यारों
कभी
भूलें
न
हम
रस्ते
भुलाने
से
सुनी
है
बात
उसने
जो
नहीं
है
वो
बढ़ी
है
बात
अब
उसके
बढ़ाने
से
- Usman Saifi
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क़फस
उदास
है
यारों
सबास
कुछ
तो
कहो
कहीं
तो
बहरे-खुदा
आज
ज़िक्र-ए-यार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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बात
करो
रूठे
यारों
से
सन्नाटों
से
डर
जाते
हैं
प्यार
अकेला
जी
लेता
है
दोस्त
अकेले
मर
जाते
हैं
Kumar Vishwas
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जैसे
पतवार
सफ़ीने
के
लिए
होते
हैं
दोस्त
अहबाब
तो
जीने
के
लिए
होते
हैं
इश्क़
में
कोई
तमाशा
नहीं
करना
होता
अश्क
जैसे
भी
हों
पीने
के
लिए
होते
हैं
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Khalid Nadeem Shani
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मुझको
ये
मालूम
नहीं
था
तुम
सेे
मिलने
से
पहले
दोस्त
जल्दी
आँखें
भरने
वालों
के
मन
जल्दी
भर
जाते
हैं
Vikas Rana
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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तुझे
कौन
जानता
था
मेरी
दोस्ती
से
पहले
तेरा
हुस्न
कुछ
नहीं
था
मेरी
शा'इरी
से
पहले
Kaif Bhopali
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ज़ईफ़ों
की
दु'आओं
का
असर
देखो
हुई
है
ज़िंदगी
ख़ुश
अब
बसर
देखो
रखी
है
मौत
मुट्ठी
में
सनम
जब
से
नहीं
है
हादसों
में
अब
कसर
देखो
चली
है
बात
कितनी
दूर
तक
यारों
मिरी
इस
बात
का
भी
तो
सफ़र
देखो
कमी
रहने
लगी
अब
दुश्मनों
की
भी
मिरे
यारों
की
ये
झूटी
ख़बर
देखो
लगा
था
साथ
देगा
उम्र
भर
तक
वो
है
बदली
उसने
अपनी
अब
नज़र
देखो
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Usman Saifi
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जिस्म
को
मेरे
वो
कुछ
यूँँ
सताती
है
एक
नागिन
जो
मेरा
माँस
खाती
है
Usman Saifi
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बड़ी
मुश्किल
से
अपने
ज़ख़्म
टाले
थे
सभी
अरमान
इस
दिल
से
निकाले
थे
डसा
मुझको
उन्हीं
साँपों
ने
है
हरपल
जो
मैंने
आस्तीनों
में
ही
पाले
थे
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Usman Saifi
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हैं
उड़ते
रंग
भी
अब
उसके
जाने
से
महक
जाते
हैं
गुल
भी
उसके
आने
से
नहीं
है
कोई
उस
जैसा
ज़माने
में
सँवर
जाएगी
क़िस्मत
उसको
पाने
से
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Usman Saifi
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कुछ
उधर
से
कुछ
इधर
से
भी
बहुत
तोड़ा
हमें
इस
मुसीबत
ने
भी
हर
इक
मोड़
पे
मोड़ा
हमें
चंद
सिक्कों
की
क़दर
इज़्ज़त
से
भी
ज़्यादा
हुई
रोटियाँ
जब
माँगी
तो
अपनों
ने
भी
छोड़ा
हमें
रोज़
उठते
रोज़
मरने
के
लिए
ऐ
ज़िंदगी
इस
गरीबी
ने
कहीं
का
भी
नहीं
छोड़ा
हमें
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Usman Saifi
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