hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Usman Saifi
badi mushkil se apne zaKHm taale the
badi mushkil se apne zaKHm taale the | बड़ी मुश्किल से अपने ज़ख़्म टाले थे
- Usman Saifi
बड़ी
मुश्किल
से
अपने
ज़ख़्म
टाले
थे
सभी
अरमान
इस
दिल
से
निकाले
थे
डसा
मुझको
उन्हीं
साँपों
ने
है
हरपल
जो
मैंने
आस्तीनों
में
ही
पाले
थे
- Usman Saifi
Download Sher Image
दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
Send
Download Image
82 Likes
मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
Send
Download Image
75 Likes
मसअला
फिर
वही
बे-घर
हुए
लोगों
का
है
हम
सभी
दिल
से
निकाले
कहाँ
तक
जाएँगे
Neeraj Neer
Send
Download Image
33 Likes
नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
Send
Download Image
28 Likes
दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
Send
Download Image
16 Likes
शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
Send
Download Image
3 Likes
दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
Send
Download Image
61 Likes
हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
Send
Download Image
45 Likes
इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
Send
Download Image
23 Likes
ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
78 Likes
Read More
हम
इस
घर
को
कब
से
सँभाले
हुए
हैं
इसी
घर
से
तो
हम
निकाले
हुए
हैं
करी
जब
हिफ़ाज़त
तो
हमने
ये
देखा
हमारे
भी
हाथों
पे
छाले
हुए
हैं
दु'आ
उस
सेे
जब
भी
मिली
है
मुझे
तब
मिरी
ज़िंदगी
में
उजाले
हुए
हैं
नहीं
कोई
शिकवा
रहा
उलझनों
से
हम
अब
उलझनों
के
हवाले
हुए
हैं
ये
जो
डस
रहे
हैं
मुझे
आजकल
यूँँ
सभी
साँप
ये
मेरे
पाले
हुए
हैं
Read Full
Usman Saifi
Download Image
0 Likes
मुझे
दुनिया
ये
अब
पागल
बनाती
है
मुझे
माँ
तू
बहुत
ही
याद
आती
है
दु'आ
जो
मेरे
हक़
में
की
थी
तूने
तब
मुझे
सबकी
नज़र
से
वो
बचाती
है
नहीं
है
कोई
भी
जो
मुझको
समझेगा
मुझे
माँ
ख़्वाब
में
आकर
बताती
है
हमेशा
हौसलों
को
दीं
उड़ानें
फिर
ये
क्यूँ
दुनिया
मज़ाक़
अब
भी
उड़ाती
है
Read Full
Usman Saifi
Download Image
1 Like
कुछ
उधर
से
कुछ
इधर
से
भी
बहुत
तोड़ा
हमें
इस
मुसीबत
ने
भी
हर
इक
मोड़
पे
मोड़ा
हमें
चंद
सिक्कों
की
क़दर
इज़्ज़त
से
भी
ज़्यादा
हुई
रोटियाँ
जब
माँगी
तो
अपनों
ने
भी
छोड़ा
हमें
रोज़
उठते
रोज़
मरने
के
लिए
ऐ
ज़िंदगी
इस
गरीबी
ने
कहीं
का
भी
नहीं
छोड़ा
हमें
Read Full
Usman Saifi
Download Image
0 Likes
राह
में
तू
इश्क़
की
खोता
है
क्या
अब
बे-वफ़ा
के
धोखे
से
रोता
है
क्या
अब
ज़िन्दगी
में
हर-सू
ये
इक
शोर
क्यूँ
है
मरने
की
हालत
में
भी
सोता
है
क्या
अब
सब्ज़
होती
ही
नहीं
दिल
की
ज़मीं
भी
बीज
ख़्वाहिश
के
तू
ये
बोता
है
क्या
अब
Read Full
Usman Saifi
Download Image
0 Likes
जिस्म
को
मेरे
वो
कुछ
यूँँ
सताती
है
एक
नागिन
जो
मेरा
माँस
खाती
है
Usman Saifi
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Mood off Shayari
Khamoshi Shayari
Raaz Shayari
Hausla Shayari
Aazaadi Shayari