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Kumar Vishwas
baat karo roothe yaaron se sannaaton se dar jaate hain
baat karo roothe yaaron se sannaaton se dar jaate hain | बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं
- Kumar Vishwas
बात
करो
रूठे
यारों
से
सन्नाटों
से
डर
जाते
हैं
प्यार
अकेला
जी
लेता
है
दोस्त
अकेले
मर
जाते
हैं
- Kumar Vishwas
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तो
क्या
उसको
मैं
होंठों
से
बजाऊँ
तिरे
दर
पे
जो
घंटी
लग
गई
है
चराग़
उसने
मिरे
लौटा
दिए
हैं
अब
उसके
घर
में
बिजली
लग
गई
है
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Fahmi Badayuni
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सखियों
संग
रँगने
की
धमकी
सुनकर
क्या
डर
जाऊँगा
तेरी
गली
में
क्या
होगा
ये
मालूम
है
पर
आऊँगा
Kumar Vishwas
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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और
हुआ
भी
ठीक
वो
ही
जिसका
डर
था
बोझ
इतना
रख
दिया
था
बुलबुले
पर
Siddharth Saaz
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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दिया
जला
के
सभी
बाम-ओ-दर
में
रखते
हैं
और
एक
हम
हैं
इसे
रह-गुज़र
में
रखते
हैं
समुंदरों
को
भी
मालूम
है
हमारा
मिज़ाज
कि
हम
तो
पहला
क़दम
ही
भँवर
में
रखते
हैं
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Abrar Kashif
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नई
सुब्ह
पर
नज़र
है
मगर
आह
ये
भी
डर
है
ये
सहर
भी
रफ़्ता
रफ़्ता
कहीं
शाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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बात
करनी
है
बात
कौन
करे
दर्द
से
दो
दो
हाथ
कौन
करे
हम
सितारे
तुम्हें
बुलाते
हैं
चाँद
न
हो
तो
रात
कौन
करे
अब
तुझे
रब
कहें
या
बुत
समझें
इश्क़
में
ज़ात-पात
कौन
करे
ज़िंदगी
भर
की
थे
कमाई
तुम
इस
से
ज़्यादा
ज़कात
कौन
करे
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Kumar Vishwas
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ख़ुद
से
भी
मिल
न
सको,
इतने
पास
मत
होना
इश्क़
तो
करना,
मगर
देवदास
मत
होना
देखना,
चाहना,
फिर
माँगना,
या
खो
देना
ये
सारे
खेल
हैं,
इन
में
उदास
मत
होना
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Kumar Vishwas
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कबूतर
इश्क़
का
उतरे
तो
कैसे?
तुम्हारी
छत
पे
निगरानी
बहुत
है
इरादा
कर
लिया
गर
ख़ुद-कुशी
का
तो
ख़ुद
की
आँख
का
पानी
बहुत
है
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Kumar Vishwas
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सखियों
संग
रँगने
की
धमकी
सुनकर
क्या
डर
जाऊँगा
तेरी
गली
में
क्या
होगा
ये
मालूम
है
पर
आऊँगा
Kumar Vishwas
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रूह
जिस्म
का
ठौर
ठिकाना
चलता
रहता
है
जीना
मरना
खोना
पाना
चलता
रहता
है
सुख
दुख
वाली
चादर
घटती
बढ़ती
रहती
है
मौला
तेरा
ताना
वाना
चलता
रहता
है
इश्क़
करो
तो
जीते
जी
मर
जाना
पड़ता
है
मर
कर
भी
लेकिन
जुर्माना
चलता
रहता
है
जिन
नज़रों
ने
काम
दिलाया
ग़ज़लें
कहने
का
आज
तलक
उनको
नज़राना
चलता
रहता
है
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Kumar Vishwas
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