zehn-o-dil men kuchh na kuchh rishta bhi tha | ज़ेहन-ओ-दिल में कुछ न कुछ रिश्ता भी था

  - Ummeed Fazli
ज़ेहन-ओ-दिलमेंकुछकुछरिश्ताभीथा
मोहब्बतमैंकभीयकजाभीथा
मुझमेंइकमौसमकभीऐसाथा
ऐसामौसमजिसमेंतूमहकाभीथा
तुझसेमिलनेकिसतरहहमआएहैं
रास्तेमेंख़ूनकादरियाभीथा
कज-कुलाहोंपरकहाँमुमकिनसितम
हाँमगरउसनेमुझेचाहाभीथा
आजख़ुदसाया-तलबहैवक़्तसे
येवहीघरहैकिजोसायाभीथा
जानेकिससहरा-ए-ग़ममेंखोगया
हाएवोआँसूकिजोदरियाभीथा
  - Ummeed Fazli
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