aql ne ham ko yuñ bhatkaaya rah na sake deewane bhi | अक़्ल ने हम को यूँँ भटकाया रह न सके दीवाने भी

  - Ummeed Fazli
अक़्लनेहमकोयूँँभटकायारहसकेदीवानेभी
आबादीकोढूँडनेनिकलेखोबैठेवीरानेभी
चश्म-ए-साक़ीभीनमहैलौदेतेहैंपैमानेभी
तिश्ना-लबीकेसैल-ए-तपाँसेबचसकेमयख़ानेभी
संग-ए-जफ़ाकोख़ुश-ख़बरीदोमुज़्दादोज़ंजीरोंको
शहर-ए-ख़िरदमेंपहुँचेहैंहमजैसेदीवानेभी
हमनेजबजिसदोस्तकोभीआईनादिखायामाज़ीका
हैराँहोकरअक्सनेपूछाआपमुझेपहचानेभी
जिस्मकीतिश्ना-सामानीसेजिस्महीना-आसूदानहीं
टूटगएइसज़दपरकररूहकेताने-बानेभी
अंदेशेऔरबज़्म-ए-जानाँदारकाज़िक्रऔरइतनासुकूत
दीवानोंकेभेसमेंशायदपहुँचेफ़रज़ानेभी
  - Ummeed Fazli
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