hijaab utthe hain lekin vo roo-b-roo to nahin | हिजाब उट्ठे हैं लेकिन वो रू-ब-रू तो नहीं

  - Ummeed Fazli
हिजाबउट्ठेहैंलेकिनवोरू-ब-रूतोनहीं
शरीक-ए-इश्क़कहींकोईआरज़ूतोनहीं
येख़ुद-फ़रेबी-ए-एहसास-ए-आरज़ूतोनहीं
तिरीतलाशकहींअपनीजुस्तुजूतोनहीं
सुकूतवोभीमुसलसलसुकूतक्यामअनी
कहींयहीतिराअंदाज़-ए-गुफ़्तुगूतोनहीं
उन्हेंभीकरदियाबेताब-ए-आरज़ूकिसने
मिरीनिगाह-ए-मोहब्बतकहींयेतूतोनहीं
कहाँयेइश्क़काआलमकहाँवोहुस्न-ए-तमाम
येसोचताहूँकिमैंअपनेरू-ब-रूतोनहीं
निगाह-ए-शौक़सेग़ाफ़िलसमझजल्वोंको
शराबकुछभीहोबे-गाना-ए-सुबूतोनहीं
ख़ुशीसेतर्क-ए-मोहब्बतकाअहदलेदोस्त
मगरयेदेखतिरादिललहूलहूतोनहीं
गर्द-ए-राहहैरुख़परआँखमेंआँसू
येजुस्तुजूभीसहीउसकीजुस्तुजूतोनहीं
चमनमेंरखतेहैंकाँटेभीइकमक़ामदोस्त
फ़क़तगुलोंसेहीगुलशनकीआबरूतोनहीं
  - Ummeed Fazli
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