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Majrooh Sultanpuri
badhaai may jo mohabbat se aaj saaqi ne
badhaai may jo mohabbat se aaj saaqi ne | बढ़ाई मय जो मोहब्बत से आज साक़ी ने
- Majrooh Sultanpuri
बढ़ाई
मय
जो
मोहब्बत
से
आज
साक़ी
ने
ये
काँपे
हाथ
कि
साग़र
भी
हम
उठा
न
सके
- Majrooh Sultanpuri
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हक़ीक़तों
की
तल्ख़ियाँ
भी
मीठे
ख़्वाब
की
तरह
मुझे
शराब
दे
रही
है
वो
गुलाब
की
तरह
Rachit Sonkar
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वो
गर
शराब
है
तो
समझो
कि
मैं
नशा
हूँ
कुछ
इस
तरह
से
भीतर
उस
शख़्स
के
बसा
हूँ
Harsh saxena
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आए
कुछ
अब्र
कुछ
शराब
आए
इस
के
बाद
आए
जो
अज़ाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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मुझे
शराब
पिलाई
गई
है
आँखों
से
मेरा
नशा
तो
हज़ारों
बरस
में
उतरेगा
Vijendra Singh Parwaaz
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आता
है
जी
में
साक़ी-ए-मह-वश
पे
बार
बार
लब
चूम
लूँ
तिरा
लब-ए-पैमाना
छोड़
कर
Jaleel Manikpuri
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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खद्दर
पहन
के
बेच
रहा
था
शराब
वो
देखा
मुझे
तो
हाथ
में
झंडा
उठा
लिया
मैं
भी
कोई
गँवार
सिपाही
न
था
जनाब
मैंने
भी
जाम
फेंक
के
डंडा
उठा
लिया
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Paplu Lucknawi
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ता'रीफ़
सुन
रहा
हूँ
बहुत
तेरे
हाथ
की
साक़ी
मेरे
लिए
भी
ज़रा
सी
निकाल
दे
Shadab Javed
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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ये
मय-कदा
है
यहाँ
हैं
गुनाह
जाम-ब-दस्त
वो
मदरसा
है
वो
मस्जिद
वहाँ
मिलेगा
सवाब
Ali Sardar Jafri
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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हम
को
जुनूँ
क्या
सिखलाते
हो
हम
थे
परेशाँ
तुम
से
ज़ियादा
चाक
किए
हैं
हम
ने
अज़ीज़ो
चार
गरेबाँ
तुम
से
ज़ियादा
Majrooh Sultanpuri
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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ऐसे
हँस
हँस
के
न
देखा
करो
सब
की
जानिब
लोग
ऐसी
ही
अदाओं
पे
फ़िदा
होते
हैं
Majrooh Sultanpuri
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