kab tak is pyaas ke sehra men jhulaste jaayen | कब तक इस प्यास के सहरा में झुलसते जाएँ

  - Ummeed Fazli
कबतकइसप्यासकेसहरामेंझुलसतेजाएँ
अबयेबादलजोउठेहैंतोबरसतेजाएँ
कौनबतलाएतुम्हेंकैसेवोमौसमहैंकिजो
मुझसेहीदूररहेंमुझमेंहीबस्तेजाएँ
हमसेआज़ाद-मिज़ाजोंपेयेउफ़्तादहैक्या
चाहतेजाएँउसेख़ुदकोतरसतेजाएँ
हाएक्यालोगयेआबादहुएहैंमुझमें
प्यारकेलफ़्ज़लिखेंलहजेसेडसतेजाएँ
आइनादेखूँतोइकचेहरेकेबे-रंगनुक़ूश
एकनादीदासीज़ंजीरमेंकसतेजाएँ
जुज़मोहब्बतकिसेआयाहैमुयस्सर'उम्मीद'
ऐसालम्हाकिजिधरसदियोंकेरस्तेजाएँ
  - Ummeed Fazli
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