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Abhishek Baba
raushni jo nahin chaandni raat men
raushni jo nahin chaandni raat men | रौशनी जो नहीं चाँदनी रात में
- Abhishek Baba
रौशनी
जो
नहीं
चाँदनी
रात
में
मुझ
सेे
होगी
नहीं
शा'इरी
रात
में
बल्ब
की
रौशनी
है
मगर
ढूँढ़ना
जुगनुओं
की
मुझे
ज़िंदगी
रात
में
इश्क़
में
रातों-दिन
हैं
इबादत
के
पर
मुझ
सेे
होती
नहीं
बंदगी
रात
में
इतना
रोया
है
वो
हिज्र
की
रात
को
उस
सेे
होती
नहीं
दिल-लगी
रात
में
- Abhishek Baba
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हाए
क्या
दौर-ए-ज़िंदगी
गुज़रा
वाक़िए
हो
गए
कहानी
से
Gulzar Dehlvi
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ज़िंदगी
तू
ने
मुझे
क़ब्र
से
कम
दी
है
ज़मीं
पाँव
फैलाऊँ
तो
दीवार
में
सर
लगता
है
Bashir Badr
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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हर
एक
काम
है
धोका
हर
एक
काम
है
खेल
कि
ज़िंदगी
में
तमाशा
बहुत
ज़रूरी
है
Khaleel Mamoon
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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तेरे
बग़ैर
भी
तो
ग़नीमत
है
ज़िंदगी
ख़ुद
को
गँवा
के
कौन
तेरी
जुस्तुजू
करे
Ahmad Faraz
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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शहर
में
तेरे
कमरा
किराए
का
बस
चाहता
हूँ
मैं
मेरा
हो
घर
भी
यहाँ
Abhishek Baba
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कहा
जैसे
ही
हमने
ख़ुद
को
सितमगर
गया
वैसे
ही
दरिया
को
पी
समुन्दर
ये
सब
चाह
कर
भी
मैं
भूलूँ
तो
कैसे
मिरा
जन्मदिन
शादी
फिर
ये
दिसंबर
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Abhishek Baba
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मेरे
तो
साथ
बस
बस
रहे
हो
बोल
के
मीठा
बस
रस
रहे
हो
साप
की
बाँबी
ये
मसअला
भी
ज़ात
बस
ज़ात
कह
डस
रहे
हो
यार
नाज़ुक
है
नब्ज़ों
की
हालत
आप
फंदा
ही
क्यूँ
कस
रहे
हो
इतनी
बारीकी
अच्छी
नहीं
है
बालों
में
ढूंढ
तुम
नस
रहे
हो
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Abhishek Baba
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मेरी
नज़रों
में
वो
तर
गया
है
ख़ूनी
का
ख़ून
जो
कर
गया
है
जिस्म
की
भूख
बस
अब
बची
है
प्यार
का
भूत
तो
मर
गया
है
जा
मिला
तब
समुंदर
को
शातिर
शहर
जब
पूरा
बस
भर
गया
है
छत
को
पक्की
बनाने
हो
वाले
तू
भी
कच्ची
से
बस
डर
गया
है
पूछो
मत
इश्क़
की
तुम
तबीयत
चार
कंधों
में
वो
घर
गया
है
बस
ख़बर
आई
उसके
ही
हिस्से
बेटा
था
जिसका
भी
मर
गया
है
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Abhishek Baba
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रब्त
क्या
आते
निभाने
आपको
राज़
होते
हैं
छुपाने
आपको
दर्मियाँ
में
ज़ात
का
है
मसअला
प्यार
में
हैं
गुल
खिलाने
आपको
वस्ल
की
शब
भी
बहाना
नींद
का
हैं
बहुत
आते
बहाने
आपको
हर
किसी
से
आप
मिलते
हैं
गले
कितनो
के
हैं
घर
बसाने
आपको
कूचा-ए-माज़ी
में
जा
कर
शा'इरी
खोटे
सिक्के
हैं
चलाने
आपको
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Abhishek Baba
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