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Abhishek Baba
meri nazon men vo tar gaya hai
meri nazon men vo tar gaya hai | मेरी नज़रों में वो तर गया है
- Abhishek Baba
मेरी
नज़रों
में
वो
तर
गया
है
ख़ूनी
का
ख़ून
जो
कर
गया
है
जिस्म
की
भूख
बस
अब
बची
है
प्यार
का
भूत
तो
मर
गया
है
जा
मिला
तब
समुंदर
को
शातिर
शहर
जब
पूरा
बस
भर
गया
है
छत
को
पक्की
बनाने
हो
वाले
तू
भी
कच्ची
से
बस
डर
गया
है
पूछो
मत
इश्क़
की
तुम
तबीयत
चार
कंधों
में
वो
घर
गया
है
बस
ख़बर
आई
उसके
ही
हिस्से
बेटा
था
जिसका
भी
मर
गया
है
- Abhishek Baba
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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कोहरा
तो
इस
उदासी
का
घना
है
और
सबका
दिल
भी
पत्थर
का
बना
है
रोने
से
मन
हल्का
होता
होगा
लेकिन
मैं
तो
लड़का
हूँ,
मुझे
रोना
मना
है
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Daqiiq Jabaali
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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वो
कभी
आग़ाज़
कर
सकते
नहीं
ख़ौफ़
लगता
है
जिन्हें
अंजाम
से
Siraj Faisal Khan
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और
हुआ
भी
ठीक
वो
ही
जिसका
डर
था
बोझ
इतना
रख
दिया
था
बुलबुले
पर
Siddharth Saaz
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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ऐसा
लगता
है
कि
तन्हाई
मुझे
छूती
है
उँगलियाँ
कौन
फिरोता
है
मेरे
बालों
में
Ashok Mizaj Badr
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बेकार
ख़यालों
से
लिपटकर
नहीं
देखा
जो
कुछ
भी
हुआ
हम
ने
पलटकर
नहीं
देखा
इस
डर
से
के
कट
जाए
न
बीनाई
के
रेशे
आँखों
ने
तेरी
राहों
से
हटकर
नहीं
देखा
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Farhat Abbas Shah
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ज़ात
शामिल
है
मेरी
तेरी
ज़ात
में
क्यूँ
उलझते
रहे
इन
रिवायात
में
राहते-दिल
को
है
नींद
लाज़िम
मगर
नींद
आती
किसे
है
भला
रात
में
एक
मुद्दत
से
हूँ
नब्ज़
था
में
हुए
मिलने
आओगे
तुम
अबकी
बरसात
में
बात
करने
को
ढेरों
पड़ी
हैं
मगर
बात
होती
नहीं
है
मुलाक़ात
में
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Abhishek Baba
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खाती
आह-ए-शब
तुम्हारी
और
मुझ
सेे
पूछती
हो
रात
सोने
के
लिए
है
ना
तो
आँखें
लाल
क्यूँँ
हैं
Abhishek Baba
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ये
कमरे
की
चार
दिवारी
है
पंखे
पे
लाश
हमारी
ये
बिस्तर
में
खू़न
के
काग़ज़
थी
इक
तरफा़
इश्क़
बिमारी
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Abhishek Baba
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रब्त
क्या
आते
निभाने
आपको
राज़
होते
हैं
छुपाने
आपको
दर्मियाँ
में
ज़ात
का
है
मसअला
प्यार
में
हैं
गुल
खिलाने
आपको
वस्ल
की
शब
भी
बहाना
नींद
का
हैं
बहुत
आते
बहाने
आपको
हर
किसी
से
आप
मिलते
हैं
गले
कितनो
के
हैं
घर
बसाने
आपको
कूचा-ए-माज़ी
में
जा
कर
शा'इरी
खोटे
सिक्के
हैं
चलाने
आपको
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Abhishek Baba
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रेत
की
नाराज़गी
जाइज़
है
यारों
ये
समुंदर
मिलता
है
बस
लहर
जितना
Abhishek Baba
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