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Abhishek Baba
rabt kya aate nibhaane aapko
rabt kya aate nibhaane aapko | रब्त क्या आते निभाने आपको
- Abhishek Baba
रब्त
क्या
आते
निभाने
आपको
राज़
होते
हैं
छुपाने
आपको
दर्मियाँ
में
ज़ात
का
है
मसअला
प्यार
में
हैं
गुल
खिलाने
आपको
वस्ल
की
शब
भी
बहाना
नींद
का
हैं
बहुत
आते
बहाने
आपको
हर
किसी
से
आप
मिलते
हैं
गले
कितनो
के
हैं
घर
बसाने
आपको
कूचा-ए-माज़ी
में
जा
कर
शा'इरी
खोटे
सिक्के
हैं
चलाने
आपको
- Abhishek Baba
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सताना
रूठ
जाना
और
मनाना
इश्क़
है
लेकिन
अगर
हद
से
ज़ियादा
हो
तो
रिश्ते
टूट
जाते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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उसके
बदन
को
दी
नुमूद
हमने
सुखन
में
और
फिर
उसके
बदन
के
वास्ते
इक
क़बा़
भी
सी
गई
Jaun Elia
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हमें
पढ़ाओ
न
रिश्तों
की
कोई
और
किताब
पढ़ी
है
बाप
के
चेहरे
की
झुर्रियाँ
हम
ने
Meraj Faizabadi
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टूटते
रिश्तों
से
बढ़कर
रंज
था
इस
बात
का
दरमियाँ
कुछ
दोस्त
थे,
और
दोस्त
भी
ऐसे,
के
बस
Renu Nayyar
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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हाथ
छूटें
भी
तो
रिश्ते
नहीं
छोड़ा
करते
वक़्त
की
शाख़
से
लम्हे
नहीं
तोड़ा
करते
Gulzar
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मैं
शाइर
उसको
चूड़ी
ही
दे
सकता
था
बस
रिश्ता
सोने
के
कंगन
देने
पर
होता
है
Neeraj Neer
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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ऐसी
हैं
क़ुर्बतें
के
मुझी
में
बसा
है
वो
ऐसे
हैं
फ़ासले
के
नहीं
राब्ता
नसीब
Afzal Ali Afzal
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ये
कमरे
की
चार
दिवारी
है
पंखे
पे
लाश
हमारी
ये
बिस्तर
में
खू़न
के
काग़ज़
थी
इक
तरफा़
इश्क़
बिमारी
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Abhishek Baba
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कहा
जैसे
ही
हमने
ख़ुद
को
सितमगर
गया
वैसे
ही
दरिया
को
पी
समुन्दर
ये
सब
चाह
कर
भी
मैं
भूलूँ
तो
कैसे
मिरा
जन्मदिन
शादी
फिर
ये
दिसंबर
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Abhishek Baba
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ज़ात
शामिल
है
मेरी
तेरी
ज़ात
में
क्यूँ
उलझते
रहे
इन
रिवायात
में
राहते-दिल
को
है
नींद
लाज़िम
मगर
नींद
आती
किसे
है
भला
रात
में
एक
मुद्दत
से
हूँ
नब्ज़
था
में
हुए
मिलने
आओगे
तुम
अबकी
बरसात
में
बात
करने
को
ढेरों
पड़ी
हैं
मगर
बात
होती
नहीं
है
मुलाक़ात
में
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Abhishek Baba
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तितलियों
की
देख
कर
के
बे-हिसी
छोड़
दी
फूलों
ने
अपनी
ताज़गी
फूल
भी
मुरझा
रहे
हैं
बीच
में
डायरी
में
शा'इरी
है
ज़ात
की
अब
न
पूछो
मैं
कहाँ
हूँ
आज
कल
किस
तरह
से
हो
रही
है
शा'इरी
इश्क़
के
पौधे
लगाने
हैं
मुझे
है
बचानी
आशिक़ी
और
साँस
भी
सोचता
हूँ
बात
कर
लूँ
आपसे
आपकी
कैसी
है
अब
नाराज़गी
रात
मेरी
पहले
से
है
पुर-ख़तर
उस
पे
फिर
नाज़िल
हैं
यादें
आपकी
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Abhishek Baba
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खाती
आह-ए-शब
तुम्हारी
और
मुझ
सेे
पूछती
हो
रात
सोने
के
लिए
है
ना
तो
आँखें
लाल
क्यूँँ
हैं
Abhishek Baba
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