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Abhishek Baba
kaha jaise hi hamne KHud ko sitamgar
kaha jaise hi hamne KHud ko sitamgar | कहा जैसे ही हमने ख़ुद को सितमगर
- Abhishek Baba
कहा
जैसे
ही
हमने
ख़ुद
को
सितमगर
गया
वैसे
ही
दरिया
को
पी
समुन्दर
ये
सब
चाह
कर
भी
मैं
भूलूँ
तो
कैसे
मिरा
जन्मदिन
शादी
फिर
ये
दिसंबर
- Abhishek Baba
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केवल
उसका
हाथ
मेरी
बर्बादी
में
और
तो
कोई
ऐब
नहीं
शहज़ादी
में
प्यार
बहुत
करता
था
उस
सेे
मैं
लेकिन
प्यार
नहीं
देखा
जाता
है
शादी
में
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Tanoj Dadhich
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दूल्हा-दूल्हन
को
नहीं
तकता
कोई
क्यूँँ
कि
उस
बारात
में
इक
चाँद
है
Shadab Javed
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तुम
भी
शादी
करके
हमको
भूल
गई
हम
भी
नाम
कमाने
में
मसरूफ़
हुए
Tanoj Dadhich
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
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रुक
गया
है
वो
या
चल
रहा
है
हमको
सब
कुछ
पता
चल
रहा
है
उसने
शादी
भी
की
है
किसी
से
और
गाँव
में
क्या
चल
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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वो
दुल्हन
बन
के
रुख़्सत
हो
गई
है
कहाँ
तक
कार
का
पीछा
करोगे?
Zubair Ali Tabish
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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जब
तक
होगा
नाम
मेरा
इस
दुनिया
में
तब
तक
तो
उसकी
शादी
हो
जाएगी
Tanoj Dadhich
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भुला
के
दूल्हा
जिसे
बैठता
है
मंडप
में
वो
चेहरा
आख़िरी
फेरे
में
याद
आता
है
Shanawar Kiratpuri
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ये
कमरे
की
चार
दिवारी
है
पंखे
पे
लाश
हमारी
ये
बिस्तर
में
खू़न
के
काग़ज़
थी
इक
तरफा़
इश्क़
बिमारी
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Abhishek Baba
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आपने
जैसे
ही
जाना
है
मौत
ने
मुझको
बस
खाना
है
इक
किराये
का
बस
घर
ही
है
आपने
महँगे
घर
जाना
है
हमको
पागल
तो
करना
नहीं
उसने
करके
ही
तो
माना
है
प्यार
में
प्यार
मुश्किल
है
ये
जिस्म
तो
आपका
दाना
है
रात
की
बातें
किस
सेे
करूँँ
आपने
जल्दी
सो
जाना
है
ख़ैर
ये
बातें
छोड़ो
भी
अब
कौन
सा
उसको
अब
आना
है
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Abhishek Baba
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रब्त
क्या
आते
निभाने
आपको
राज़
होते
हैं
छुपाने
आपको
दर्मियाँ
में
ज़ात
का
है
मसअला
प्यार
में
हैं
गुल
खिलाने
आपको
वस्ल
की
शब
भी
बहाना
नींद
का
हैं
बहुत
आते
बहाने
आपको
हर
किसी
से
आप
मिलते
हैं
गले
कितनो
के
हैं
घर
बसाने
आपको
कूचा-ए-माज़ी
में
जा
कर
शा'इरी
खोटे
सिक्के
हैं
चलाने
आपको
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Abhishek Baba
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मेरी
नज़रों
में
वो
तर
गया
है
ख़ूनी
का
ख़ून
जो
कर
गया
है
जिस्म
की
भूख
बस
अब
बची
है
प्यार
का
भूत
तो
मर
गया
है
जा
मिला
तब
समुंदर
को
शातिर
शहर
जब
पूरा
बस
भर
गया
है
छत
को
पक्की
बनाने
हो
वाले
तू
भी
कच्ची
से
बस
डर
गया
है
पूछो
मत
इश्क़
की
तुम
तबीयत
चार
कंधों
में
वो
घर
गया
है
बस
ख़बर
आई
उसके
ही
हिस्से
बेटा
था
जिसका
भी
मर
गया
है
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Abhishek Baba
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ज़ात
शामिल
है
मेरी
तेरी
ज़ात
में
क्यूँ
उलझते
रहे
इन
रिवायात
में
राहते-दिल
को
है
नींद
लाज़िम
मगर
नींद
आती
किसे
है
भला
रात
में
एक
मुद्दत
से
हूँ
नब्ज़
था
में
हुए
मिलने
आओगे
तुम
अबकी
बरसात
में
बात
करने
को
ढेरों
पड़ी
हैं
मगर
बात
होती
नहीं
है
मुलाक़ात
में
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Abhishek Baba
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