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Abhishek Baba
mere to saath bas bas rahe ho
mere to saath bas bas rahe ho | मेरे तो साथ बस बस रहे हो
- Abhishek Baba
मेरे
तो
साथ
बस
बस
रहे
हो
बोल
के
मीठा
बस
रस
रहे
हो
साप
की
बाँबी
ये
मसअला
भी
ज़ात
बस
ज़ात
कह
डस
रहे
हो
यार
नाज़ुक
है
नब्ज़ों
की
हालत
आप
फंदा
ही
क्यूँ
कस
रहे
हो
इतनी
बारीकी
अच्छी
नहीं
है
बालों
में
ढूंढ
तुम
नस
रहे
हो
- Abhishek Baba
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हम
सेे
मिलिए
नशे
की
हालत
में
बिन
पिए
होश
ही
नहीं
रहता
Harsh Kumar
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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मुफ़लिसी
थी
और
हम
थे
घर
के
इकलौते
चराग़
वरना
ऐसी
रौशनी
करते
कि
दुनिया
देखती
Kashif Sayyed
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ख़ुद
जिसे
मेहनत
मशक़्क़त
से
बनाता
हूँ
'जमाल'
छोड़
देता
हूँ
वो
रस्ता
आम
हो
जाने
के
बाद
Jamal Ehsani
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हाल
ये
है
कि
अपनी
हालत
पर
ग़ौर
करने
से
बच
रहा
हूँ
मैं
Jaun Elia
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मिल
के
होती
थी
कभी
ईद
भी
दीवाली
भी
अब
ये
हालत
है
कि
डर
डर
के
गले
मिलते
हैं
Unknown
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बी.ए
भी
पास
हों
मिले
बी-बी
भी
दिल-पसंद
मेहनत
की
है
वो
बात
ये
क़िस्मत
की
बात
है
Akbar Allahabadi
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कब
करे
ये
दिल
मुहब्बत
नौकरी
दिन
खा
रही
है
Ravi 'VEER'
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एक
ही
तो
हवस
रही
है
हमें
अपनी
हालत
तबाह
की
जाए
Jaun Elia
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मेहनत
से
है
अज़्मत
कि
ज़माने
में
नगीं
को
बे-काविश-ए-सीना
न
कभी
नामवरी
दी
Bahadur Shah Zafar
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मेरी
नज़रों
में
वो
तर
गया
है
ख़ूनी
का
ख़ून
जो
कर
गया
है
जिस्म
की
भूख
बस
अब
बची
है
प्यार
का
भूत
तो
मर
गया
है
जा
मिला
तब
समुंदर
को
शातिर
शहर
जब
पूरा
बस
भर
गया
है
छत
को
पक्की
बनाने
हो
वाले
तू
भी
कच्ची
से
बस
डर
गया
है
पूछो
मत
इश्क़
की
तुम
तबीयत
चार
कंधों
में
वो
घर
गया
है
बस
ख़बर
आई
उसके
ही
हिस्से
बेटा
था
जिसका
भी
मर
गया
है
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Abhishek Baba
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आपने
जैसे
ही
जाना
है
मौत
ने
मुझको
बस
खाना
है
इक
किराये
का
बस
घर
ही
है
आपने
महँगे
घर
जाना
है
हमको
पागल
तो
करना
नहीं
उसने
करके
ही
तो
माना
है
प्यार
में
प्यार
मुश्किल
है
ये
जिस्म
तो
आपका
दाना
है
रात
की
बातें
किस
सेे
करूँँ
आपने
जल्दी
सो
जाना
है
ख़ैर
ये
बातें
छोड़ो
भी
अब
कौन
सा
उसको
अब
आना
है
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Abhishek Baba
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जिसे
तुम
ढूँढती
रहती
हो
मुझ
में
ग़ज़ल-गोई
के
शाने
लग
गया
वो
Abhishek Baba
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तितलियों
की
देख
कर
के
बे-हिसी
छोड़
दी
फूलों
ने
अपनी
ताज़गी
फूल
भी
मुरझा
रहे
हैं
बीच
में
डायरी
में
शा'इरी
है
ज़ात
की
अब
न
पूछो
मैं
कहाँ
हूँ
आज
कल
किस
तरह
से
हो
रही
है
शा'इरी
इश्क़
के
पौधे
लगाने
हैं
मुझे
है
बचानी
आशिक़ी
और
साँस
भी
सोचता
हूँ
बात
कर
लूँ
आपसे
आपकी
कैसी
है
अब
नाराज़गी
रात
मेरी
पहले
से
है
पुर-ख़तर
उस
पे
फिर
नाज़िल
हैं
यादें
आपकी
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Abhishek Baba
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तेरे
नज़दीक
आ
कर
सोचता
हूॅं
हसीना
ख़ुद-कुशी
की
इतनी
दिलकश
Abhishek Baba
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