laakhon dinon ke bojh tale gham-raseeda log | लाखों दिनों के बोझ तले ग़म-रसीदा लोग

  - Tahir Hanfi
लाखोंदिनोंकेबोझतलेग़म-रसीदालोग
अपनीतलाशमेंहैंरवाँसर-बुरीदालोग
धागेख़ुशीकेअपनेबदनसेलपेटकर
ज़ख़्मोंकीबस्तियोंमेंरहेआब-दीदालोग
बोहरानमेरेइस्मकोदेकरचलेगए
जोमेरेअहदमेंथेकभीना-शुनीदालोग
इकअहदकेसफ़रमेंअनाभीशरीकथी
लेकिनउसेसमझसकेबे-अक़ीदालोग
वोमेरेहीख़यालकेरौशननिशानहैं
लफ़्ज़ोंमेंजोबयानहुएख़त-कशीदालोग
  - Tahir Hanfi
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