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Shadan Ahsan Marehrvi
hain lahu se kaii guna badhkar
hain lahu se kaii guna badhkar | हैं लहू से कई गुना बढ़कर
- Shadan Ahsan Marehrvi
हैं
लहू
से
कई
गुना
बढ़कर
वो
जो
एहसास
के
मरासिम
हैं
- Shadan Ahsan Marehrvi
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इसी
लिए
हमें
एहसास-ए-जुर्म
है
शायद
अभी
हमारी
मोहब्बत
नई
नई
है
ना
Afzal Khan
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लाई
है
किस
मक़ाम
पे
ये
ज़िंदगी
मुझे
महसूस
हो
रही
है
ख़ुद
अपनी
कमी
मुझे
Ali Ahmad Jalili
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ज़ोर
चलता
है
औरत
पे
सो
मर्द
ख़ुश
बीवी
पे
ख़त्म
मर्दानगी
की
समझ
Neeraj Neer
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ख़ाक
आएँगे
हम
किसी
को
समझ
ख़ुद
को
हम
ख़ुद
समझ
नहीं
आते
Shajar Abbas
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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दर्द
में
शिद्दत-ए-एहसास
नहीं
थी
पहले
ज़िंदगी
राम
का
बन-बास
नहीं
थी
पहले
Shakeel Azmi
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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ये
नहीं
है
कि
वो
एहसान
बहुत
करता
है
अपने
एहसान
का
एलान
बहुत
करता
है
आप
इस
बात
को
सच
ही
न
समझ
लीजिएगा
वो
मेरी
जान
मेरी
जान
बहुत
करता
है
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Jawwad Sheikh
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दोनों
हाथों
को
तेरे
हाथ
समझ
कर
जानाँ
अपने
गालों
पे
ख़ुद
ही
रंग
लगाया
मैंने
Upendra Bajpai
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देख
कर
हर
कोई
बेकार
समझ
ले
मुझ
को
अपनी
उल्फ़त
में
गिरफ़्तार
समझ
ले
मुझ
को
बिना
उसके
तिरी
जन्नत
मुझे
मंज़ूर
नहीं
तू
मिरी
मान
गुनहगार
समझ
ले
मुझ
को
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Faiz Ahmad
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Shadan Ahsan Marehrvi
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रोग
दिल
का
बड़ा
ही
सरकश
है
ये
सितम
नाज़-ए-तर्ज़-ए-महवश
है
है
नज़र
शोख़
की
मेरे
दिल
पर
और
हाथों
में
उसके
तरकश
है
राज़
हस्ती
के
ये
ख़ुदा
जाने
कौन
सूफ़ी
है
कौन
मयकश
है
राज़
मजनू
ने
ये
कहा
सब
सेे
हाए
उल्फत
बड़ी
ही
सरकश
है
है
तिलावत
में
कैफ़
किस
दर्जा
आज
मस्जिद
में
कोई
मयकश
है
है
नुमाया
जो
अक्स
परदे
में
ये
नज़ारा
भी
ख़ूब
दिलकश
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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ग़म
मुसलसल
है
राब्ता
कम
है
हाए
तब्दीलियों
का
मौसम
है
चाक
दामन
है
इश्क़
में
मेरा
हाल
मजनू
से
क़ैस
से
कम
है
बस
के
दीदार
की
तमनना
है
आँख
इस
शौक़
में
मेरी
नम
है
न
कहूँ
कुछ
अगर
तो
है
अच्छा
बात
जितनी
भी
मैं
करुँ
कम
है
कैसे
भर
दे
वो
ज़ख़्म
उल्फ़त
के
चारा-गर
भी
तो
इबने
आदम
है
शब
-ए-
हिजरां
का
हो
पहर
जैसे
ज़ुल्फ़
वल्लेल
में
जो
ये
ख़म
है
तुझ
से
मन्सूब
हैं
बहारें
सब
और
जो
तू
नहीं
तो
मातम
है
वो
अता
कीं
हैं
नेमतें
या
रब
उम्र
भर
सजदे
में
रहूँ
कम
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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रंग
दिल
पर
वही
है
चाहत
का
इश्क़
दोनों
तरफ़
बराबर
है
देख
तेरे
फ़िराक़
में
जानाँ
किस
तरह
कट
रहा
दिसम्बर
है
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दिल
को
मेरे
मलाल
कैसा
है
अलग़रज़
ये
ज़वाल
कैसा
है
हिज्र
तूने
जिया
नहीं
वाइज़
क्या
कहूँ
तुझ
सेे
हाल
कैसा
है
मेरी
हर
बात
से
गिला
है
उसे
जाने
वो
हमख़याल
कैसा
है
यूँँ
करे
रब
कि
जब
पड़े
मुश्किल
मुझ
सेे
पूछे
कि
हाल
कैसा
है
वक़्त-ए-मुश्किल
में
हौसला
रखना
चल
खड़ा
हो
निढ़ाल
कैसा
है
बारहा
सोचता
हूँ
मैं
अक्सर
जाने
मेरा
ख़याल
कैसा
है
इक
बिरहमन
ने
फिर
कहा
अच्छा
देखते
हैं
कि
साल
कैसा
है
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Shadan Ahsan Marehrvi
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